गोवर्धन एसडीएम के विरूद्ध नारेबाजी कर वाहन चालक महासंघ एडीएम कानून व्यवस्था को ज्ञापन देते नेता।
राजकीय वाहन चालक महासंघ ने की शिकायत
मथुरा। ईमानदार, निष्ठावान और कार्य के प्रति सक्रिय एसडीएम पर एक चालक ने मारपीट और अभद्रता का आरोप लगाया है। हालांकि यह किसी के गले नहीं उतर रहा लेकिन राजकीय वाहन चालकों ने ज्ञापन देकर चक्काजाम करने की बात कही लेकिन एडीएम के समझाने पर चक्काजाम स्थगित हो गया। राजकीय वाहन चालक महासंघ ने आज जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन एडीएम प्रशासन को दिया जिसमें एसडीएम गोवर्धन विश्वभूषण मिश्र पर आरोप लगाया है कि उन्होंने गाड़ी के चालक किशन सिंह के साथ अभद्र व्यवहार किया। बताया गया कि 20 अगस्त को लगभग 12.40 बजे एसडीएम ने चालक किशन सिंह से आरओ प्लांट से पानी लाने को कहा। किशन सिंह पानी ले आया और अपने लिये उसने पानी मांगा तो एसडीएम साहब के आवास पर खारी पानी था। जब एसडीएम साहब से पानी मांगा तो उन्होंने पूछा कि तुम्हारी जाति क्या है? जब मैने बताया कि मैं जाटव हूं तो एसडीएम साहब भड़क गये और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुये कहने लगे तेरी हिम्मत कैसे हुयी पानी छूने व लेने की। जब मैंने इससे मना कर दिया तो वे डण्डा लेकर गाली गलौज करते हुये पीटने की नीयत से दौड़े। मैंने भागकर अपने को बचाया, वरना वे मारपीट कर सकते थे। वाहन चालक ने किसी अन्य अधिकारी की गाड़ी पर अपनी तैनाती की मांग की है। जबकि वाहन चालक परिचालक संघ ने इस पर कार्यवाही की मांग की है।
वाहनों चालकों का चक्काजाम स्थगित
राजकीय वाहन चालक महासंघ के जिलाध्यक्ष और मंत्री ने एक पत्र के माध्यम से लिखित सूचना दी है कि चालक किशनसिंह के साथ एसडीएम द्वारा किये गये अभद्र व्यवहार के बाद कर्मचारियों ने एडीएम लाॅ एण्ड आॅर्डर को समस्या समाधान को ज्ञापन दिया। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिये जिलाधिकारी से वार्ता कर आंदोलन स्थगित करने का आग्रह किया जिस पर राजकीय वाहन चालक महासंघ द्वारा चक्काजाम, आंदोलन अग्रिम समाधान कार्यवाही तक स्थगित कर दिया गया है।
एसडीएम ने सिरे से खारिज किये आरोप
जब इस संबंध में एसडीएम गोवर्धन विश्वभूषण मिश्र से ‘छोटी सी बात’ संवाददाता ने बात की तो उन्होंने कहा कि घटना काफी पुरानी है और पूरी तरह झूठी है। उस समय चालक और किसी अन्य व्यक्ति का आपस में महावन तहसील में विवाद हुआ था। इन लोगों का आपसी झगड़ा था, मैं बाहर निकलकर जरूर आया और मैंने इन लोगों से न झगड़ने की बात कही। इससे अधिक कोई बात नहीं हुयी, जो भी आरोप लगाये जा रहे हैं वे पूरी तरह निराधार हैं क्योंकि मैं स्वयं इस कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही करने की कह चुका हूँ। इस प्रकार कोई भी अधिकारी अपने छोटे कर्मचारी के साथ व्यवहार नहीं करता है। केवल झूठे आरोप लगाने से कुछ नहीं होता। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।





