घर परिवार का अहम किरदार नारी- किशार स्वर्ण

मथुरा। घर परिवार में हर दिन गंुजते उपरोक्त वाक्य अलग अलग जरूर है, किन्तु हर संम्बोधन नारी के लिए ही है। जो हर घर परिवार का अहम किरदार है। वंे कामकाजी हैं, घर संम्भालती हैं, बच्चों को पालती है, सभी की जरूरतों का ख्याल करती हैं। इसके बावजूद पति टंेशन में रहते हैं, बच्चे कहना नहीं मानते। घर के कामों से फुर्सत नही ंमिलती अपने लिए हर नारी जो सभी को खुश करने के प्रयास में लगी रहती है, वह घर के हर कार्य कर के भी स्वयं परेशान रहती है। ऐसे में हर नारी जो स्वयं में खुश रहना चाहती हंै और घर परिवार को भी खुशामय बनाना चाहती हैं तो निरंकारी सत्संग से बेहतर कोई विकल्प नही है। संत निरंकारी मिशन के मार्ग दर्शक सदगुरूदेव निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महाराज समझाते है कि ग्रहस्थ का संम्बध हमारे सांसारिक या सामाजिक जीवन से है। इसके कुछ अपने असूल हंै। जब इंसान इन असूलों की पालना में चूक कर जाता है,वहीं कोई न कोई परेशानी आ जाती है। वे असूल यही ंहै ंकि घर मे सभी सदस्यो को यथा योग्य सम्मान दिया जाये। मां हो या सास, बहिन या नन्द, पिता हो या सुसर हरे किसी रश्तें का अपना स्थान है और अपना महत्व है। जो कोई भी अपनी सीमा से बाहर जायेगा तो ग्रहस्थ मे हल चल होना स्वाभाविक है। इसलिये एक दूसरे के गुण स्वभाव को अच्छी तरह समझें। एक दूसरे की रूचि का आदर करें। अधिकार जताने के बजाय कर्तव्यों के पालन पर ध्यान दें कि घर में सभी सदस्यों का तथा योग्य सम्मान दिया जाऐ। माँ हो या सास, बहन हो या ननद, पिता हो या ससुर, हर एक रिश्ते का अपना स्थान हैै, अपना महत्व है। जब कोई भी अपनी सीमा से बाहर जायेगा तो ग्रहस्थ में हल चल होना स्वाभाविक है। इसलिए एक दूसरे के स्वभावको समझें। एक दूसरे की रूचि का आदर करें। अधिकार जताने की बजाय कर्तव्यों के पालन पर ध्यान दें। निरंकारी सत्संग से सीख ले कर हजारों नारियों ने अपने घर परिवार की तस्वीर बदल दी, वें सिर्फ प्रवचन सुनने तक सीमित नहीं रहीं बल्कि सत्गुरू द्वारा प्रदान ब्रम्हज्ञान को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर, अपने आचरण द्वारा प्रेम, शान्ति तथा शाली माता का माहौल देकर अपने ही घर को स्वर्ग बना दिया है। निरंकारी नारी सत्संग भी होते हैं। हर शहर में जहाँ सास-बहु, ननद भौजाई, देवरानी जेठानी, पति पत्नी, के बीच रिश्तों में मिठास लाने तथा आपस मे पे्रम बढाने का प्रयास किया जा रहा है। जिन घरो मे सत्संग होता है वहाँ सास बहु लडती नही बल्कि माँ बेटी सा प्रेम करती हैं। नारी अगर चाहे तो घर परिवार को एकत्व की डोर मे बांधे रख सकती है, इसके लिए प्रेम नम्रता तथा सहनशीलता के आभूषणो को धारण करना जरूरी है। तभी घर परिवार की तस्वीर बदलेगी और स्वर्गमय नजारा भी दिखेगा।

 


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