चैमुंहा। चित्त में चिंता लग रही है। मैं दिन भर यही सोच करूं, मेरे पास नहीं पैसा बेटी, तेरे कैसे पीले हाथ करूं? ब्रह्मा जी के मेला के उपलक्ष्य में पथवारी मंदिर पर रसिया दंगल के दौरान दहेज पर गया रसिया लोगों के दिल को चीर गया। इसके अलावा अनेक रसिया प्रस्तत किए गए।
रसिया दंगल का शुभारम्भ निहाली सिंह, कारे सिंह, पूर्व सभासद लाखन सिंह सिसौदिया एवं ईश्वर लाल भगत ने संयुक्त रूप से किया। दंगल कमेटी ने सभी अतिथियों का पटुका ओढ़ाकर स्वागत किया। कलाकारों ने महाभारत, भागवत, गीता, रामायण, हनुमान कथा के वास्तविक बिंदुओं का स्पर्श कर एक दूसरे पर सवाल-जवाब किए। रात भर श्रोताओं ने थिरकते हुए रसियों का आनन्द लिया। आचार संहिता के चलते गायक राजनीति बिंदुओं से कन्नी काट गए। रामायण के चरित्र में जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द पर आरोप लगाते हुए एक धोबी ने अपनी पत्नी को घर से यह कर लौटा दिया कि वह कोई राम चन्द्र नहीं है। सीता जी की अग्नि परीक्षा के प्रसंग को सुन कर श्रोता भाव विभोर हो गए। एक के एक बाद एक अच्छे रसिया श्रोताओं को तालियां बजाने को विवश कर रहे थे। कई बार तो पुलिसकर्मियों को भीड़ को काबू में करना पड़ा। पवन गोपाल अखाड़ा मुरसान एवं बंसत अखाड़ा हाथरस के बीच बेहद रोमांचक रसिया दंगल हुआ। यंू तो दोनों पार्टी बराबर रहीं, मगर श्रोताओं ने पवन गोपाल आखाड़ा को श्रेष्ठ माना।
किसकी मजाल यहां जो भारत मां पर आंख उठाए, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, लहर लहर लहराए।
भगवान कृष्ण पर बैजंती माला कहां से आई, आजादी की शान तिरंगा, सर का ताज बना रखा है। देश के हर रखवालों ने यह अपने हाथ उठा रखा है। हम सभी हिन्दुस्तानी याद कर रहे हैं तेरी कहानी। भूल नहीं पाए ये शहीदों की कुर्बानी, सीमा पर अड़े देश की खातिर अपना खून बहा रखा है। कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में पूर्व सभासद ठा. लाखन सिंह सिसौदिया थे। अध्यक्षता निहाली सिंह ने की। संचालक भूपाल सिंह ने किया। इस मौके पर व्यवस्थापक कारे बाबा, पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि ओंकार सिंह, कपूरा सेठ, सुरेश मेंम्बर, ईश्वर लाल भगत, लीला सिंह, सुघनो नेता, रौतान सिंह, सुखराम डायरेक्टर, लीला सुपरवाइजर, प्रहलाद सिंह, ओमप्रकाश, संजय सिंह सिसौदिया, बीके सिसौदिया, एनआर राजपूत, सतपाल सिंह, विक्रम सैनी, डब्बू सिसौदिया आदि मौजूद थेे।





