
रालोद मुखिया बाप-बेटे का पता नहीं
अपने दादा के गण में भी रालोद का गिर रहा जनाधार
मथुरा। जनपद में किसानों के मसीहा स्व0 चैंधरी चरण सिंह के रालोद को पूर्व से ही किसानों की पार्टी माना जाता रहा हैं। इन्हीं किसानों के बलवूतें राष्ट्रीय लोकदल ने जनपद में कई बार अपनी ध्वजा पताका फहराई हैं। जनपद का किसान प्रारंभ से ही पूर्व प्रधानमंत्री चैं0 चरण सिंह का अनुयायी रहा हैं जनपद के किसानों ने ही पिछलें समय में चैधरी चरण सिंह के परिवार के वारिस जयन्त चैधरी को राजनैतिक वारिश मानतें हुए सांसद की गदृदी तक पहुंचाया था। वहीं रालोद मुखिया चैं0 अजीत सिंह और उनके पुत्र व पूर्व सांसद जयन्त चैधरी भी अपने दादा को याद दिलाते हुए जनपद के किसानों से उनके सुख दुख में हर समय साथ रहनें का भरोसा दिलाते है पिछलें चुनाव में राजनैतिक आकड़ों के चलते जयन्त चैधरी सांसद के चुनाव में पराजित क्या हुए उन्होंने लगता है कि जनपद के किसानों से नाता तोड़ लिया हैं। हालांकि जनपद से वर्तमान में भी दो विधान सभा क्षेत्रों में उनके विद्यायक है इसके वावजूद अपनी जमीनों के मुआवजें की माॅग को लेकर आन्दोलन कर रहें किसान अपने चैं0 चरण सिंह के पुत्र और नाती की वाट जोह रहें है लगभग एक सप्ताह पूर्व अपनी माॅगों को लेकर आन्दोलन कर रहें किसानों पर प्रशासन ने जिस तरह लाठिया भाजने के साथ प्रताडि़त कर मुआवजा देने की जगह कई किसानों को जेल में डाल दिया। इसके बावजूद एक सप्ताह गुजर जाने के बाद भी किसानों का हमदर्द कहें जाने वाले रालोद का दूर दूर तक पता नहीं हैं। एक ओर जहाॅ सैकड़ों किसान अपनी मुआवजें की माॅग को लेकर निरन्तर सघर्ष करने में धरने पर बैठे हैं। वहीं भारीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति के तहत किसानों के आन्दोलन को अपना आन्दोलन बनाने का पूरा प्रयास किया है कां्रगेंस भी इस प्रयास में पीछें नहीं हें। उसके नेता निरन्तर किसानों के सम्पर्क में हैं। पर किसानों का माने जाने वाला दल रालोद के मुखिया चैं0 अजीत सिंह और उनके पुत्र पूर्व सांसद जयन्त चैधरी का दूर दूर तक कहीं पता नहीं हैं। अपने नेताओं की कार्य प्रणाली को देखतें हुए स्थानीय रालोद के पदाधिकारी भी किसानों की माॅग के समर्थन में आने से कतरा रहें हैं। इसी का परिणाम है कि रालोद जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सिकरवार सहित विभिन्न पदाधिकारी व विद्यायक अभी तक किसानों के इस आन्दोलन में शामिल नहीं हुए हैं। मात्र रालोद के एक विद्यायक पूरन प्रकाश ने स्थानीय परिस्थितियों को देखतें हुए किसानों से सम्पर्क की कोशिश की है लेकिन पिछलें समय में हाईवें, विद्युत पानी जैसी माॅगों को लेकर रालोद मुखिया और पूर्व सांसद ने जिस तरह किसानों के बीच आकर मोर्चा खोला था वह अब दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा हैं। अनेकों किसान रालोद मुखिया की इस कार्यशैली से अपने को ठगा महसूस कर रहें हैं। सवाल यह भी उठता है कि पिछलें लोक सभा चुनाव में रालोद का प्रदेश से पूरा सफाया होने के बाद पुनः अपनी जड़ जमानें को किसानों के हमदर्द और चैं0 चरण सिंह के अनुयायी रहें नेताओं के अन्य दलों के नेताओं को साथ लेकर मेरठ क्षेत्र में आधार बनाने में जुटें हैं। वहीं किसी समय चरण सिंह का लघु वागपत माने जाने वाला मथुरा के किसानों को ना जाने रालोद ने मुंह फेर लिया हैं। किसान इसें चैंधरी अजीत सिंह और जयन्त चैधरी की मौका परस्ती मान रहें है। किसानों का कहना है कि आज जनपद का किसान जब सघर्ष के दौर से गुजर रहा है और रालोद के नेता राज्यसभा में जाने की जुगत में लगें हैं। इस मौके के बाद वह किस मुंह से आगामी होने वालें चुनावों में किसानों के बीच आकर वोट माॅगेेगे।






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