मथुरा। जनपद में खाकी की छवि दिन प्रतिदिन दाग-दार होती जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को इस पर मंथन करने की जरूरत है। हालांकि वे इसके निदान भी कर रहे हैं लेकिन उसका प्रभाव सामने नहीं आ रहा है। अभी हाल की घटनाओं को देखे तो वृंदावन में जिस प्रकार ‘भजनकुटी’ जैसे साधु संतों के स्थल पर भूमाफियाओं की बर्बर कार्यवाही हुई और साढ़े तीन घंटे बाद भी इलाका पुलिस नहीं पहुंची। पहले तो मामले को जिले स्तर पर अनसुनी कर औपचारिकताएं निभाई गई लेकिन जब प्रदेश स्तर से डंडा चला तो स्थानीय अधिकारियों को भी इस मामले में लापरवाह वृंदावन कोतवाल और कई चैकी इंचार्जों को हटाना पड़ा। अभी हाल में बलदेव पुलिस के दरोगा पर महिला द्वारा लगाया गया बलात्कार का आरोप और इससे पूर्व भी एक खाकी वर्दी पर ऐसा ही आरोप खाकी की छवि को खराब कर रहा है। जनता का विश्वास कम कर रहा है लेकिन बड़े अधिकारी इस पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे। गोविन्द नगर थाना क्षेत्र में जमीनों पर कब्जे की घटनाओं ने भी पुलिस की छवि को प्रभावित किया है। इससे पूर्व थानाध्यक्ष महावन पर जिस प्रकार एक हत्या के मामले में कार्रवाई हुई, वह अपने आपमें अलग घटना है। थानाध्यक्ष रिफाइनरी भी ऐसे ही एक मामले में आरोपों के घेरे में थे लेकिन पीड़ितों की कमजोर देखभाल के चलते खाकी इसमें सफल हो गई। यह उनकी जीत नहीं जनता से घटता विश्वास है। जिसे पुलिस के बड़े अधिकारी महत्व नहीं दे रहे। इस सबसे समाज में गलत संदेश जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। कई और ऐसे मामले में जिसमें थाने पर तैनात थानाध्यक्षों का व्यवहार इतना रूखा और गंदा होता है कि आम आदमी उनसे बात करने से कतराता है। जनप्रतिनिधि अपने निजी स्वार्थों के चलते कभी इस पर नहीं बोलते। लेकिन जनमानस इस सबसे उबल रहा है। थाने-चैकियांे पर पैसे का खेल आम होता जा रहा है। पीड़ित का रिपोर्ट लिखवाना दूभर हो गया है। दबंग और पैसे वालों के काम में पुलिस नियम-कानून और खाकी का महत्व भी भूल जाती है। ठीक है, सत्ता से जुड़ाव के चलते इस खेल को आप कुछ समय तक तो खेल सकते है लेकिन इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि जनता उग्र होती है तो सत्ता और खाकी तो क्या, बड़ी-बड़ी हुकूमतें धरी रह जाती है। जनपद पुलिस में इस समय जो पैसे का खेल प्रभावी हो रहा है, वह अच्छे संकेत नहीं है। थानों पर कुछ ऐसे लोग पैसे के बल पर जगह पा गए हैं, जिनका काम पुलिसिंग न होकर अपराध अपराधियों से लूट और जनमानस को दुत्कार बन कर रह गया है। अब इस पर ध्यान देने की जरूरत है।





