शहीद पुलिस अधिकारियों को मौके पर छोड़ने वाले भी आने चाहिये सामने
मथुरा। जवाहरबाग प्रकरण में साहस का परिचय देकर शहादत देने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों की मौत को लेकर अब जनपद में तरह-तरह के सवाल लोग खड़ा करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में डीएम और एसएसपी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिये और तब तक उन्हें यहां से हटा देना चाहिये ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें। वहीं जवाहरबाग ऑपरेशन में साहसी दोनों पुलिस अधिकारियों को अकेला छोड़ने वाले कुछ पुलिस के अधिकारियों और उनके साथ गयी पुलिस टीम से भी पूछताछ होने पर पता चलेगा कि आखिर ये लोग कैसे उन दोनों को अकेला छोड़कर चले आये। वरिष्ठ अधिकारियों ने क्यों एसपी सिटी को अकेले वहां जाने दिया? यह ऐसे सवाल हैं जो आज जनमानस उठा रहा है। योजना को अमलीजामा पहनाने से पूर्व सुरक्षा व्यवस्था और हथियारों के माकूल बंदोबस्त न होने का परिणाम था कि दोनों की जान चली गयी। अब वरिष्ठ अधिकारी भले ही अपने आप को कितना भी सही बतायें लेकिन इन दोनों पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की जरूर इस प्रकरण में चूक रही है। मुख्यमंत्री से लेकर तमाम जानकार भी इस तथ्य को सही मान रहे हैं। अगर बढिया योजना और पूरी ताकत से ऐसे दुष्टों पर हमला होता तो कम से कम दो लोकप्रिय अधिकारियों की जान नहीं जाती। कमिश्नर अलीगढ को जांच सौंपी गयी है और इस जांच में अभी तक ज्यादा पूछताछ भी नहीं हुयी है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रदेश सरकार और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहलू को गंभीरता से नहीं लिया। दोषियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही न होने से भी लोग क्षुब्ध हैं। जनपद के लोग इस बात को जोरशोर से उठा रहे हैं कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में पूरी तरह असफल साबित हुये। भले ही रामवृक्ष जैसा आताताई और उसके प्रमुख कमाण्डर इस घटना में मारे गये हों लेकिन बड़े अधिकारियों को अब तक इसमें सजा आखिर क्यों नहीं दी गयी? रोज-रोज यह सवाल तेजी से उठ रहा है।





