ब्रज के विकास को सभी को आगे आना चाहिए

मथुरा। ब्रज बचाओ समिति के सदस्यों ने जिलाधिकारी मथुरा को पत्र के माध्यम से मथुरा और वृन्दावन के विकास को लेकर बड़ी-बड़ी चिंताएं जाहिर करने वालों को एक मंच पर लाकर ब्रज के विकास का एक नया खाका तैयार करने का अनुरोध किया है। समिति ने कहा है कि रोजाना अनेक संगठन और समितियों का गठन हो रहा है। राज्य सरकार, केंद्र सरकार, नगर पालिका, जिला परिषद, मथुरा-वृन्दावन डेवलपमेंट अथॉरिटी, आवास विकास परिषद, ताज ट्रॅपेजियम जोन अथॉरिटी और न जाने कितने निकायों की अलग-अलग समितियां और संगठन बनाए जा चुके हैं। जो ब्रज के विकास पर कार्य करेंगी।

मण्डलायुक्त द्वारा मथुरा को गौशाला क्षेत्र घोषित किया है। मुख्य विकास अधिकारी ऑर्गेनिक फार्मिंग और वर्मी-कम्पोस्ट को प्रोत्साहित करना चाहते हैं, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, संत-महात्मा, फोजध्छावनी, बिल्डर्स और कॉलोनाइजर सभी अचानक मथुरा-वृन्दावन के विकास के लिए चिंतित हो गए हैं। 

जमीनी हकीकत यह है कि ब्रज भूमि की मौलिकता का सत्यानाश दिनों दिन हो रहा है। वन क्षेत्र लगातार घटते जा रहे हैं।  नदी, तालाब, कुण्ड पुरानी इमारतें व मंदिरों की सम्पत्तियां सब खतरे में हैं। हर तरफ निमार्ण ही निर्माण हो रहे है। 

अनुमति मिलने का इन्तजार कोई नहीं कर रहा है अवैध निर्माण के चलते तमाम काॅलोनियां विकसित हो रही हैं।

 

पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी से इन सभी ‘‘क्रन्तिकारी विकास’’ में सहयोग दे रही संस्थाओं के मुखियाओं की एक बड़ी सभा करके ब्रज भूमि के समग्र विकास का एक नया प्रारूप खींचे जाने का सुझाव दिया है। जिस पर सब एक जुट होकर कार्य कर पाएं। 

समिति ने चिन्ता जाहिर करते हुए कहा है कि अभी जो कुछ हो रहा है, वह भविष्य के लिये ठीक नहीं हो रहा है। वर्तमान में जिस तरह से काम को अंजाम दिया जा रहा है, उससे विकास नहीं विनाश को आमंत्रण दिया जा रहा है। ब्रज बचाओं समिति की ओर से श्रवण कुमार, सुनील शर्मा, मनोज चैधरी, पवन गौतम, दीपक शास्त्री, रहीश कुरैशी, पंकज दीक्षित, सुवीर सेन, संजीव सिंह, जाहिद सईद, कुंज बिहारी भारद्वाज, अनेक सिंह, विजयकांत शर्मा आदि ने जिलारधिकारी महोदय को ब्रज विकास पर चिन्ता जाहिर की है।

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