मथुरा। वृंदावन में मंदिर ज्यादा है या यहां की आबादी(लोग)। यह व्यंग करते हुए प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि वृंदावन में जितने मंदिर हैं, शायद उतनी आबादी नहीं होगी। यहां दोनों की संख्या का पता ही नहीं चलता। आज विज्ञान की प्रगति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज अगर देश के किसी हिस्से में कोई आवाज उठे तो तुरंत अमेरिका तक पहुंच जाएगी। लेकिन पांच सौ वर्ष पूर्व चैतन्य महाप्रभु ने कैसे प्रेम का संदेश नवदीप से आकर वृंदावन से लेकर देश के सभी कौने में पहुंचा दिया, यह भी उनकी भक्ति का ही कमाल है। चेतन्य महाप्रभु के पंचशती समारोह के उदघाटन के मौके पर आये उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने उदघाटन मंच से बोलते हुये कहा कि चेतन्य महाप्रभु ने प्रेम का संदेश दिया है। उनकी सोच जाति, धर्म से हटकर थी। सभी लोगों में सौहार्द बनाये रखने की कामना करते थे। भक्तिपूर्ण कीर्तन पद्धति से प्रभु को पाया और संकीर्तन पद्धति से भी प्रभु प्राप्ति का संदेश हमें दिया। वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश चैतन्य महाप्रभु की अनुकरणीय देन है। इस दौरान उन्होंने कहा कि विज्ञान प्रगति तो जरूर कर रही है, लेकिन लोग आज भी कुष्ठ रोगियों से नफरत करते हैं। उन्होंने स्वयं के बारे में कहा कि मैं जाति, धर्म या संप्रदाय को नहीं मानता मेरा उद्देश्य केवल लोगों की सेवा करना और भाईचारे को बढ़ावा देना है। मथुरा-वृंदावन को धर्म व संस्कृति का केन्द्र बताते हुए कहा कि यहां से भाईचारे की भावना का संदेश जाता है।





