
मथुरा। शहर के मसानी स्थित श्री गुरू विरजानंद आर्य गुरूकुल वेदमंदिर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष गुरू पूर्णिमा महोत्सव आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के गुरूवर श्री विरजानंदजी की जयंती के रूप में मनाया गया। जाता है। इस अवसर पर नवीन ब्रम्हचारियों की प्रवेश दीक्षा तथा उपनयन संस्कार कराकर यज्ञोपवीत धारण कराया गया। वेद मंदिर के अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश जी महाराज ने महोत्सव में आये श्रद्धालुओं का आशीर्वाद रूपी संत्सग ज्ञान से मार्गदर्शन करते हुए कहा कि जब हमारा चरित्र अच्छा होगा तो हम सत्याचरण करेगें। सत्याचरण रुपी धर्म को अपनाकर अपने जीवन को देश धर्म को समर्पित करें तभी देश बचेगा। मानव जीवन की कुंजी ही चरित्र है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अच्छे विचार भी दें ताकि भविष्य में बच्चे चरित्रवान होकर अपने कुल व देश का नाम रोशन कर सकें। श्री आचार्य ने कहा कि आज धर्म के नाम पर समाज में चारों तरफ पाखण्ड फैल रहा है। संसार में ईश्वर सबका रखवाला है और उसकी व्यवस्था को जो तोडता है समझो देश में पाखण्ड फैला रहे हैं। इससे पहले वेद मंदिर परिसर स्थित यज्ञशाला में में वैदिक विधि विधान से यज्ञ सम्पन्न हुया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने आहूतियां दी। तथा वहां उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए विशाल भण्डारे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में अनूप चैधरी, सत्यप्रिय आर्य प्रधान, आचार्य हरीप्रकाश, आचार्य शत्रुजित शास्त्री, कृष्णवीर शर्मा, डा.कपिल प्रताप सिंह, विवेक प्रिय आर्य, विपिन बिहारी, रमेशचन्द्र आर्य, सत्यप्रकाश अग्रवाल, लाल सिंह आर्य, आचार्य नरेन्द्र, हरी सिंह आर्य, सोनू मलिक, नबाव सिंह नब्बी, प्रेम सिंह जादौन, डा.अर्चना प्रिय आर्य, वंदना प्रिय आर्य, सरोज रानी आर्य आदि सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।






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