मिशन द्वारा किया जाएगा यमुना में गिर रही नालियों को रोकने का प्रयासः पं0 अनिल शर्मा
मथुरा। यमुना शुद्वि संकल्प मिशन 2015 के तहत कराए जा रहे घाटों के जीर्णोद्वार कार्य में दिन-प्रतिदिन तेजी आ रही है। सोमवार को मिशन ने सभी की सहमति से यह निर्णय लिया कि श्री कृष्ण गंगा घाट के आसपास की सभी छोटी नालियों को जोडकर एक नाले का रूप दिये जाने का कार्य कराया जाएगा जिससे शहर के नालों के माध्यम से आने वाला गंदा पानी सीध्े यमुना में न गिर सके। मिशन के संयोजक पं0 अनिल शर्मा ने बताया कि सभी नालियों को जोडकर एक नाले का रूप देने से से जहां एक ओर शहर की गंदगी यमुना में समाहित नहीं होगी वहीं दूसरी ओर यमुना के घाटों के किनारे पेड-पौधें का रोपण कर वहां के क्षेत्रा का पर्यटन की दृष्टि से विकसित कराया जाएगा। श्री शर्मा ने गोवधर््न से आए देवेन्द्र शर्मा, आनंद बाबा, दाउदयाल शर्मा, राजू पंेटर, विष्णु शर्मा, मुकेश ठाकुर, लपूटी पंडित, आशीष हनुमान जी वाले, शारदा शर्मा आदि की उपस्थिति में पारूल शर्मा को रामायण पाठ का प्रमुख नियुक्त किया। उनका कहना था कि अब रामायण पाठ की प्रमुख पारूल शर्मा के नेतृत्व में रामायण टीम ब्रज के विभिन्न क्षेत्रों में जाएगी और लोगों से यमुना शुद्वि के इस मिशन में सहयोग करने की अपील करेगी। हरिओम बाबा ने कहा कि यह रामायण पाठ ब्रज 84 कोस के प्रत्येक क्षेत्रा में आयोजित किया जाएगा जिससे यमुना भक्त जागरूक हो सकें और इस कार्य में अपना हाथ बढाएं। उन्होंने कहा कि रामायण पाठ के माध्यम से ठाकुर जी से प्रार्थना की जाएगी कि ये कार्य सपफल हो। उन्होंने आगे बताया कि विकास के कार्यो के अन्र्तगत जिन घाटों का जीर्णोद्वार यमुना शुद्वि संकल्प मिशन 2015 के अन्र्तगत पूर्व में कराया गया था अब उन घाटों पर रंगाई व पुताई का कार्य प्रारम्भ करा दिया गया है। इस अवसर पर रामायण प्रमुख पारूल शर्मा ने कहा कि मिशन द्वारा उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है वह उसका पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगी। उन्होंने ब्रज की महिलाओं से अपील कि है कि वे इस कार्य में आगे आकर मिशन का सहयोग करें जिससे मिशन अपनी समय सीमा से पूर्व ही अपने कार्य को पूर्ण कर सके। दाउदयाल शर्मा ने बताया कि मथुरा व दिल्ली की तरह ही गोवधर््न से भी यमुना श्ुाद्वि संकल्प मिशन 2015 को पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है और शीघ्र ही मिशन अपने उद्ेश्यों की पूर्ति कर लेगा। उन्होंने आगे कहा कि मिशन के माध्यम से उन्हें यह जो यमुना को शुद्व व सापफ कराने का अवसर प्राप्त हुआ है इसके लिए वे स्वंय को भाग्यशाली मानते हैं और आवश्यकता पडने पर वे अपनी मां यमुना की रक्षा के लिए हर संभव सहयोग करने को तैयार हैं।





