
गोवर्धन रोड स्थित ज्ञानदीप षिक्षा भारती सभागार में गायत्री तपोभूमि के सौजन्य से आयोजित त्रिदिवसीय पुस्तक मेला के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए ज्ञानदीप के सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि गाँधी जी को चने की पुडि़या के कागज में छपे राजा हरिषचन्द्र की सत्यवादिता के एक वाक्य ने इतनी प्रेरणा दी कि उन्होंने जीवन भर सत्य बोला। मेले में प्रदर्षित पुस्तकें जीवन के पग - पग पर ऐसी ही प्रेरणा प्रदान करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि गायत्री तपोभूमि के संस्थापक आचार्य श्रीराम षर्मा ने वेद, पुराण , धर्म , आध्यात्म, षिक्षा, संस्कृति, षारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य आदि सैकड़ो विशयों पर हजारों पुस्तकों की रचना की है। इन पुस्तकों का रचनात्मक विचारधारा के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान है।
श्री भाटिया ने पीड़ा के साथ कहा कि आचार्य श्रीराम षर्मा का साहित्यिक क्षेत्र में मूल्यांकन नहीं हो सका है। वह वास्तव में पùविभूशण सम्मान के अधिकारी हैं और उन्हें मरणोपरान्त यह सम्मान प्रदान किया जाना चाहिए।
षैक्षिक निदेषक के0 जी0 माहेष्वरी ने कहा कि पुस्तक मेला से बच्चों को यह जानकारी मिली कि पाठ्य पुस्तकों के सीमित ज्ञान सें परे विभिन्न विधाओं में साहित्य का सृजन हुआ है।
प्रधानाचार्या श्रीमती निधि भाटिया ने गायत्री तपोभूमि के प्रति धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि पुस्तक मेला से छात्र- छात्राओं में पुस्तक पढ़ने की रुचि जागृत हुई और यह जानकारी मिली कि ज्ञान का अगाध भंडार पुस्तकों में है।
गायत्री तपोभूमि परिवार के रवीन्द्र तिवारी ने पुस्तक मेला में ज्ञानदीप परिवार द्वारा दिये गये सहयोग की सराहना की और कहा कि हमारा विष्वास है कि पुस्तक मेला से विद्यार्थियों को सार्थक सन्देष दिया जा सका है।






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