रेल जनक ग्राउज को भूला प्रशासन 19 अक्टूबर 1875 को मथुरा में चली पहली रेल

मथुरा। आधुनिक मथुरा के निर्माता, व तत्कालीन कलेक्टर ग्राउज के योगदानों का लाभ आज भले ही लाखों लोग उठा रहे हांे। मगर यह सच है कि उन्हें राजकीय संग्रहालय मथुरा को छोड़कर रेल प्रशासन समेत कई संस्थाओं ने याद नहीं किया। जबकि यह ग्र्राउज का ही जज़्बा था जिसने सरकारी तथा व्यक्तिगत प्रयासों को प्रोत्साहन देकर 19 अक्टूबर 1875 को मथुरा और हाथरस रोड स्टेशन के बीच रेल सेवा का सपना साकार कर दिखाया। इस दुःखद विषय को लेकर डाॅ0 रमेश चन्द्र शर्मा स्मारक शोध व सेवा संस्थान के तत्वावधान में रविवार को गोशाधाम कालोनी स्थित कार्यालय पर आयोजित बैठक में खेद वक्त किया गया। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि ग्र्राउज के रेलवे योगदान को लेकर स्थानीय प्रशासन समेत रेल गाडि़यों को पिछले तीन वर्षों से अवगत कराया जाता रहा लेकिन रेल प्रशासन ने अपनी धरोहर के संरक्षण व प्रचार-प्रसार पर कभी कोई उत्सुकता नहीं दिखायी। डाॅ0 शर्मा ने बताया कि उस ज़माने में 9,55,688 रूपये की कुल लागत में 30,000 रूपये प्रति मील की दर से बनी 29-5 मील लंबी लाइन पर रेल चलना वर्तमान में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से ज़रा भी कम दिलचस्प नहीं थी। इस नजारे को देखने के लिए मथुरा से हाथरस के बीच लाखों लोग रेलवे लाइन के किनारे रूटों पर खड़े थे। ग़ौरतलब है कि बजट में से स्थानीय शेयर होल्डर्स की जमा कुल पंूजी 3,24,100 में से सेठ लखमीचन्द के बाद कम ब्याज दर पर सबसे ज़्यादा शेयर ग्राउज ने ही खरीदे थे क्योंकि उन्हें पूरा भरोसा था कि वह कभी मथुरा में कलेक्टर के पद से हटाये नहीं जायंेगेे। मगर किसे पता था कि उन्हें पद से हटाया ही नहीं जायेगा बल्कि इस महान योगदान के लिए 139 वर्षों बाद भी याद नहीं किया जायेगा। इसी क्रम में विक्रम पाल सिंह ने बताया कि यह ग्राउज की दूरदर्शिता का ही नतीजा था कि हाथरस के बाद मथुरा जल्द राजपूताना स्टेट रेलवे से जुड़कर जंक्शन बन गया जिसने देश के पूरव और पश्चिम इलाकों में विस्तार कर भरपूर लाभ प्राप्त किया। अगले क्रम में सुनील शर्मा ने बताया कि ग्राउज की रेल परियोजना इतनी लोकप्रिय हुई कि भारतेन्दुयुगीन साहित्यकार राधाचरण गोस्वामी ने उसे वृन्दावन तक विस्तार करने की पेशकश की। नतीजतन 1930 तक वृन्दावन भी रेल नेटवर्क से जुड़ गया। समापन पर डाॅ0 शर्मा ने रेल प्रशासन से जंक्शन और कैंट स्टेशन पर हेरिटेज काॅरीडोर बनवाने की मांग की। बताया कि मथुरा के रेल नेटवर्क ने ब्रिटिशकालीन ,एतिहासिक घटनाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम की अनेक घटनाओं पर हस्ताक्षर किये हैं जिन्हें प्रर्दशित कर राष्ट्रीय घटनाओं के साथ-साथ स्थानीय योगदान को भी गौरवान्वित किया जा सकता है। इस अवसर पर नारायण सिंह खरे, डाॅ0 प्रहलाद सिंह, वी0सी0 पाठक, आर0 एल0 गुप्ता, के0के0 वाल्यान आदि उपस्थित थे।


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