मथुरा। रोडवेज डिपार्टमेन्ट की कई बसे वर्षो से विभागीय लोगों की मिली भगत के चलते फर्जी टिकट व डग्गेमारी का हिस्सा बनी है। मथुरा से अलीगढ़ रूट पर यात्रियों को सफर तय कराने वाली ये बसें पूरी तरह से विभागीय अधिकारियों की कृपा पात्र है। 9306, 9938, 3745 आदि नम्बरों से संचालित इन बसों में रोजाना सैकड़ों यात्री यात्रा कराते है। ऐसा नहीं कि इन यात्रियों को टिकट उपलब्ध नहीं होती है लेकिन इन टिकिटों का कोई रिकार्ड विभाग के पास नहीं होता। वहीं कई बसें वर्कशाॅप में एण्ट्री दिखाने के बाद रूटचार्ज में दौड़ाई जाती है। इन बसों से मिलने वाली आमदनी अधिकारियों के ऊपरी खर्चो से इस्तेमाल की जाती है। राया रूट पर कभी कभार चैकिंग करते टीएस इन बस संचालकों को चैक करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वहीं यह खेल दूसरे मंडलों में भी संचालित है। वर्षो से ऊपरी आमनंदनी का जरिया बनी इन सरकारी गाडि़यों द्वारा कमाया जाने वाला धन आगरा मंडल से लेकर लखनऊ तक भी भेजा जाता है। इस व्यवस्था के चलते यहां चल रहे इस गोरख धंधे पर कोई जिम्मेदार अधिकारी लगाम कसने की स्थिति में नहीं है। वहीं पूर्व में अखबारों में छपी खबरों के आधार पर इनमें से कुछ बसे गोवर्धन रूप पर भी पकड़ी गई। कार्यवाही के बाद पुनः यही गोरखधंधा पुनः शुरू कर दिया गया। विभाग से जुड़े सूत्र बताते है कि इन बसों को विभागीय एआरएम व डीआरएम का संरक्षण पूरी तरह प्राप्त है। सूत्र ये भी बताते है कि दर्जनभर गाडि़यों को मथुरा में तैनात एआरएम के इशारे पर ही चलवाया जा रहा है। रोजमर्रा में हजारों की आमनदनी का बंदर बांट विभागीय अधिकारियों को भी भेजा जा रहा है। रोडवेज डिपार्टमेंट को घाटे का सौदा साबित हो रहे ये अधिकारी अपनी पहुंच व काली कमाई के चलते मेहमानबाजी कर निजी सम्पत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे है। जिससे खबर के असर के रूप में कुछ विभागीय कार्यवाही करते हुए गोवर्धन रूट पर फर्जी बस पकड़ी गई थी। बाद में वहीं सिलसिला पुनः पूरी तरह जारी किया जा रहा है।





