कलक्टैªट पर धरना प्रदर्शन करते शिक्षामित्र
ज्ञापन देकर एनसीटीई से टैट से छूट दिलाने की मांग
मथुरा। हाईकोर्ट द्वारा शिक्षमित्रों का समायोजन रद्द किये जाने के बाद शिक्षमित्रों का गुस्सा थम नहीं रहा है। आज भी सैंकड़ों शिक्षामित्रों ने कलैक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। शिक्षामित्रों ने आज फिर कलैक्ट्रेट स्थित वटवृक्ष पर इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया और उप्र के प्राथमिक विद्यालयों में चैदह वर्षों से कार्यरत शिक्षामित्रों को एनसीटीई द्वारा टैट से छूट दिलाने की मांग की। इस अवसर पर प्रशासन को ज्ञापन भी दिया। ज्ञापन में शिक्षामित्रों ने कहा है कि पिछले चैदह वर्षों से 2250 से 3500 रूपये प्रतिमाह पर प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाते हुये शिक्षामित्रों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी परंतु कुछ बीएड, बीटीसी अभ्यर्थियों द्वारा शिक्षामित्रों के समायोजन पर रोक लगाने हेतु उच्च न्यायालय में रिट की गयी जबकि बीएड वाले स्वयं मार्च 2014 के बाद प्राथमिक विद्यालयों में कार्य करने हेतु अर्ह नहीं हैं। वर्तमान में केवल पूरे प्रदेश में 34000 बीटीसी अभ्यर्थी प्रशिक्षणरत हैं। इस याचिका पर भारत सरकार व एनसीटीई द्वारा उप्र को लिखित अनुमति प्रदान करने के बाद भी कोर्ट में काउंटर एफिडेबिट को गलत तरीके से उच्च न्यायालय में दिया गया जिसके कारण प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों के 14 वर्षों के कार्य को नजरअंदाज करते समायोजन निरस्त कर दिया गया जबकि एनसीटीई ने उत्तराखण्ड, महाराष्ट्र, मप्र के शिक्षामित्रों को टैट से लिखित छूट प्रदान की है। मानव संसाधन विकास मंत्री दिल्ली को भेजे ज्ञापन में इन शिक्षामित्रों ने कहा है कि भारत सरकार के अधीन एनसीटीई द्वारा उत्तर प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों के साथ न्याय करते हुये एनसीटीई से अन्य राज्यों की तरह टैट से छूट दिलायें। ज्ञापन पर खेम सिंह चैधरी, मुंसिफ अली, दुष्यंत सारस्वत, हाकिम सिंह के हस्ताक्षर हैं।






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