सपा नेता की शिकायत भी दबी रह गयी भ्रष्ट अधिकारियों के दलदल में

भुगतान का क्षेत्रफल बढ़ाने को दबा दिया नालियों और फुटपाथ भी

पीला ईंट और कमजोर पेवर ईंटों का हो रहा धडल्ले से प्रयोग

सड़क निर्माण में इण्टरलाॅकिंग में कार्य में छिपायी गयी नालियां

पीडब्लूडी की सड़क को दबाकर हो रहा इण्टरलाॅकिंग कार्य

नाली में प्रयुक्त पीला ईंट दिखाते सपा नेता अरविन्द अग्रवाल 

 

राया। जनता की समस्या और पीड़ाओं के निदान को लोगों ने जिसे अपना प्रतिनिधि चुन कर कस्बे का चेयरमैन बनाया वो अब जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बजाय उन्हीं के शोषण पर आमादा है। वही चेयरमैन क्षेत्रीय विकास के नाम पर जनता के पैसे को खुलेआम लुटा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कस्बे के आयरा खेड़ा लिंक रोड के बेवजह कराये जा रहे पुनः निर्माण में देखनें को मिला। लोक निर्माण विभाग द्वारा कुछ समय पूर्व ही ठीक ठाक गुणवत्ता से बनायी गयी ये नयी सड़क चेयरमैन द्वारा बेवजह पुनः बनवायी जा रही है। वहीं पूर्व में बनी ठीक ठाक सड़क को मिटटी से दबा दिया है। सिर्फ लाखों के बन्दर बांट के लिये बन रही इस सड़क निर्माण में व्यापक धांधली की जा रही है। पहली मजबूत डाबर रोड को दबा कर पीला ईटों और निम्न स्तर का पेवर कार्य अब यहां बेवजह किया जा रहा है। बेवजह की इस सड़क निर्माण में ठेकेदार नगर पंचायत और लोक निर्माण विभाग के कई अधिकारियों कर्मचारियों के अलावा शासन प्रशासन के भी कई लोग शामिल है। इसीलिये सब इस ओर से मुंह फेरे बैठे है और जनता का पैसा खुलेआम मिटटी में मिलाया जा रहा है। 

सूबे में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के स्थानीय नगर अध्यक्ष अरविन्द अग्रवाल द्वारा इस मामले की की गयी शिकायत को भी भ्रष्ट अधिकारियों के दलदल में दबाया जा रहा है। श्री अग्रवाल ने जब इस मामले को जोरदारी से उठाया और लगातार शिकायतें कर दूध का दूध और पानी का पानी करने का प्रयास किया तो उनकी सुनवायी होने की बजाय उल्टे उन पर तरह तरह के दबाब डाले जा रहे है और उन्हें तरह तरह से धमकियां भी दी जा रही है। 

दरअसल मामला नगर पंचायत राया और लोक निर्माण विभाग के अफसरों की मिलीभगत का है। इन दोनों ही कार्यालय के सम्बन्धित अधिकारियों में कुछ इस तरह की सांठ गांठ बैठ गयी है कि नगर पंचायत में स्थानीय निकाय के अधिकतर विकास कार्य के रूप में सिर्फ सड़क निर्माण कार्य ही करा रहा है। नगर पंचायत के अधिकारी लोक निर्माण विभाग की सड़कों के किनारे के फुटपाथ और नाली निर्माण कार्य के लिये के आवेदन कर लोक निर्माण विभाग अधिकारियों से एक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेते है। जिसके लिये लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी भारी मात्रा में सुविधा शुल्क मुहैया कराया जाता है। इसी अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर नगर पंचायत ठेकेदारों से सांठ गांठ कर उस पूरी बनी हुई सड़क को ही बनवा डालते है। यहां तक कि कस्बा राया में ठेकेदार अधिक भुगतान के लिये सड़कों किनारे बनी नालियों को भी बन्द करने से नहीं चूके है। धड़ल्ले से नगर पंचायत द्वारा किये जा रहे इस तथाकथित विकास के ऐसे कई उदाहरण सामने आये है।

 

पहला मामला

कस्बे के गांव आयरा खेड़ा लिंक रोड के निर्माण कार्य में इसी प्रकार नगर पंचायत ने लोक निर्माण विभाग से सड़क किनारे की नालियों एवं फुटपाथ के निर्माण के लिये एक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर उस बेवजह पूरी सड़क के उपर ही इण्टर लाॅकिंग निर्माण कार्य करा दिया है। वहीं ठेकेदार के भुगतान हेतु क्षेत्रफल बढाने के लिये कहीं कहीं नालियों को भी दबा दिया गया है। साथ ही जहां नाली निर्माण किया जा रहा है वहां बिल्कुल खराब और पीला ईंटों को उपयोग किया जा रहा है। वहीं यहां कार्यरत ठेकेदार की दबंगई के चलते अगर कोई व्यक्ति उससे शिकायत करता है भी है तो वे उससे लड़ने मरने को आमादा हो जाते है।

दूसरा मामला

दूसरे मामले में नगर पंचायत राया के तथाकथित आवेदन पत्रांक 492/न0पा0रा0/ 14-15 दिनांक 30-01-15 पर लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियन्ता निर्माण खण्ड 1 लोक निर्माण विभाग मथुरा द्वारा दिनांक 12 फरवरी 2015 को जारी किये गये अनापत्ति प्रमाण पत्रांक 665/ई19 के अनुसार नगर पंचायत को विभाग ने अपने रोड राया मांट मार्ग से नागल मार्ग जो नगर पंचायत के वार्ड संख्या 10-12 में स्थित है के दोनों ओर फुटपाथ एवं नाली निर्माण हेतु जारी किया। लेकिन इसके बावजूद वहां बनी हुई पीडब्लूडी की पूरी सड़क को नगर पंचायत द्वारा बेवजह बनवाया जा रहा है।

तीसरा मामला

उपरोक्त की भांति नगर पंचायत ने अपने आवेदन पत्रांक 494/न0पा0रा0/14-15 दि0 30-01-15 द्वारा पीडब्लूडी कें ही पीपीएमबी राज्य मार्ग संख्या 33 राया मांट मार्ग एवं राया नीमागंव मार्ग के दोनां ओर फुटपाथ एवं नाली निर्माण को लोक निर्माण विभाग से उनके पत्रांक 666/ई19 दिनांक 12 फरवरी 2015 द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर पूरी सड़क का ही निर्माण कार्य करा डाला है।

सड़के लोक निर्माण विभाग की है। उनके निर्माण एवं उनके रख रखाव आदि की जिम्मेदारी भी लोक निर्माण विभाग की होने के बावजूद नगर पंचायत कस्बे व नगर पंचायत की अन्य सड़कों पर ध्यान न देकर इन्ही सड़कों को बनवाने में ज्यादा सहभागिता कर रहा है। वे सड़के जो अभी कुछ ही दिनों पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा बनवायी गयी है उन्हें नगर पंचायत ने पुनः बनवा डाला है। कस्बे के लोग नगर पंचायत की इस कार्यप्रणाली को लेकर जमकर नगर पंचायत और सरकारी कार्यप्रणाली को कोस रहे है। वहीं चेयरमैन बहुत ही बेहतरी के साथ बने इस लिंक रोड की सड़क का बेवजह पुनः निर्माण करा कर नगर पंचायत और जनता के पैसे का दुरूपयोग कर रहे है। लेकिन कोई भी अधिकारी कर्मचारी इस ओर जानबूझ कर ध्यान देना भी जरूरी नहीं समझ रहा है। 

वहीं प्रदेश में सत्तारूढ समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष अरविन्द अग्रवाल ने जब इस मामले की शिकायतें उच्च अधिकारियों से की तो अधिकारियों ने उनकी सुनवायी तो दूर मामले को रफा दफा कराने के लिये भी भारी स्तर पर प्रयास किये। वहीं उन्हें तरह तरह के प्रलोभन और जब प्रलोभनों से भी बात नहीं बनी तो उन्हें धमकियां भी दी गयी।


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