सरकार की अल्ट्रासाउण्ड जांच फ्री की घोषणा
कमीशन लेकर निजी अल्ट्रासाण्ड संचालकों की जेब भर रहे हैं चिकित्सक
मथुरा। जनपद के सरकारी चिकित्सालयों में समाजवादी स्वास्थ्य योजना की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। प्रदेश सरकार ने भले ही अल्टासाउड की जांच फ्री कर दी है लेकिन यहां मरीजों की जेब कट रही है और चिकित्सक मोटा कमीशन ले, निजी अल्ट्रासाउड संचालकों की जेब भारी करा रहे हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउड मशीन तो है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं। जिला महिला चिकित्सालय में रेडियोलॉजिस्ट भी है और मशीन भी, लेकिन यहां अल्ट्रासाउड एक वर्ष से बंद है। जबकि मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट संयुक्त सौ शैय्या चिकित्सालय में करीब पांच माह पूर्व राजधानी से खरीदकर भेजी गई अल्ट्रासाउड मशीन धूल फांक रही है। यहां अभी तक इस मशीन को पैकिंग से खोला भी नहीं गया है। इन तीनों ही अस्पतालों में चिकित्सक अल्ट्रासाउड जांच को लिखते हैं लेकिन चिकित्सालय में यह जांच न होने पर मरीजों के परिजन बाहर से उक्त जांच कराने को मजबूर होते हैं। ज्ञात रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक सितम्बर 2015 को सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउड जांच फ्री करने का ऐलान किया है लेकिन जनपद के चिकित्सालयों में अल्ट्रासाउड मशीन तो हैं लेकिन रेडियोलाॅजिस्ट नहीं और महिला चिकित्सालय में मशीन व रेडियोलाॅजिस्ट दोनों है तो भी कमीशन के चलते अल्ट्रासाउड नहीं किए जाते। इसी तरह सौ शैय्या वृंदावन में अल्ट्रासाउड मशीन है लेकिन वहां रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। निजी अल्ट्रासाउड संचालक प्रति जांच 400 से साढ़े पांच सौ रुपए तक वसूलते हैं। जहां सौ शैय्या चिकित्सालय वृंदावन में प्रतिदिन करीब 50 से लेकर 70-80 तक अल्ट्रासाउड प्रोवाइड किए जाते हैं वहीं महिला चिकित्सालय मेें भी गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए बड़ी संख्या में सलाह दी जाती है। इसी तरह जिला चिकित्सालय में भी अल्ट्रासाउड की जांचे लिखी जाती हैं। ये सभी जांचे मरीज बाहर से कराते हैं। जिसके बदले जांच लिखने वाले चिकित्सकों को 200 रुपए से लेकर 250 रुपए प्रति केस कमीशन मिलता है।





