मथुरा। ज्ञानदीप शिक्षा भारती में आयोजित हिन्दी दिवस समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए ज्ञानदीप के संस्थापक सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 50 वर्ष बीत जाने पर भी हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित नहीं किया गया है जब कि जन जन की भाषा होने के कारण हिन्दी राष्ट्रभाषा है। शैक्षिक निदेशक केजी माहेश्वरी ने प्रश्न किया कि यदि हिन्दी इस देश की राष्ट्र भाषा नहीं हो सकती है तो हिन्दी के अतिरिक्त ऐसी कौन सी दूसरी भाषा है जो सम्पूर्ण देश में बोली तथा समझी जा सकती हो? प्रधानाचार्या निधि भाटिया ने कहा कि हमें हिन्दी बोलने में गर्व होना चाहिए। हम सदैव अपनी भाषा हिन्दी में बात कर गर्वित हों। हिन्दी अध्यापिका शशि टण्डन ने कहा कि उत्तर भारत में तमिल, तेलगु, मलयालम को भले ही नहीं समझा जाय किन्तु दक्षिण भारत के हर प्रदेश में हिन्दी को समझा जाता है। इस अवसर पर प्रिया चतुर्वेदी, प्राची अरोड़ा, दक्ष भाटिया, भव्य सेठी, राहुल अग्रवाल, शुभम आदि ने अपनी काव्य- रचनाओं द्वारा हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग और हिन्दी साहित्य के अध्ययन का आह्वान किया।





