सोने-चांदी में लगी आग के बीच दूसरे धातु बाजारों में भी निखर रहा है नजारा...


सोने-चांदी की कीमतों में लगी आग से निवेशकों की झोलियां तो भर गई हैं, लेकिन अभी भी कुछ निवेशक ऐसे हैं, जो इस रैली से 'चूक' गए हैं। यदि वे अब इतना बड़ा जोखिम न लेना चाह रहे हों  तो कुछ दूसरी धातुओं में निवेश करके भी वे अच्छी कमाई कर सकते हैं।

महंगी धातुओं से इतर, शेयर बाज़ार में इस समय तांबा, अल्युमीनियम, जस्ता और स्टील सेक्टर को लेकर भी तस्वीर बेहद दिलचस्प हो गई है। तांबा और अल्युमीनियम को ऊर्जा संक्रमण और हरित तकनीक की मांग से सबसे बड़ा सहारा मिल रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट में इनकी खपत लगातार बढ़ रही है। इससे निवेशकों की नज़र इन पर भी टिकी हुई है।

जस्ता की कहानी थोड़ी अलग है। यह निर्माण और गैल्वनाइज्ड स्टील की मांग पर निर्भर करता है। जब इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश बढ़ता है, तो जस्ता की कीमतें भी ऊपर जाती हैं। लेकिन, यह उतना तेज़ नहीं है जितना तांबा या अल्युमीनियम नजर आते हैं।

दूसरी ओर, स्टील सेक्टर का मूड सरकारों के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की मांग से तय होता है। भारत और चीन जैसे देशों में चल रहे कई बड़े प्रोजेक्ट से स्टील की खपत मजबूत बनी हुई है, लेकिन ऊर्जा लागत और लौह अयस्क की कीमतें इसे दबाव में भी ला सकती हैं।

कुल मिलाकर, तांबा और अल्युमीनियम को 'ग्रोथ मेटल' कहा जा सकता है। ये आने वाले सालों में निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक रहेंगे। जस्ता और स्टील स्थिरता और अवसरवादी निवेश के लिए अच्छे हैं, लेकिन उतनी तेज़ी नहीं दिखाते हैं।

एक लाइन में कहें तो बाज़ार की धड़कन फिलहाल तांबा और अल्युमीनियम में सबसे ज़्यादा सुनाई दे रही है। जस्ता अपनी जगह बनाए हुए है। स्टील इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से खड़ा है। लेकिन, असली चमक उन धातुओं में है जो भविष्य की ऊर्जा और तकनीक को आकार दे रही हैं। अगले एक साल की अवधि में जस्ता, तांबा, अल्युमीनियम और स्टील सेक्टर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए निवेशकों की नज़र कुछ चुनिंदा कंपनियों पर टिक सकती है।

तांबा और अल्युमीनियम की मांग हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से लगातार बढ़ रही है। इस लिहाज़ से हिंडाल्को, नाल्को और वेदांता जैसी कंपनियां निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती हैं। हिंडाल्को का अल्युमीनियम व्यापार और वेदांता का बेस मेटल पोर्टफोलियो इन ट्रेंड से सीधा फायदा उठा सकता है। नाल्को अगले एक साल में निवेशकों के लिए एक स्थिर और संभावित ग्रोथ स्टोरी नजर आती है। कंपनी का ध्यान अल्युमीनियम और एल्यूमिना उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट पर है। इससे अगले वित्तीय वर्ष में सकारात्मक रुख दिख रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट में तांबे की बढ़ती मांग हिंदुस्तान कॉपर को भी अगले सालों में ग्रोथ का बड़ा अवसर देती है। भारत में तांबा उत्पादन का यह प्रमुख नाम है और हरित तकनीक की कहानी से सीधा जुड़ा हुआ है।

स्टील सेक्टर में भारत सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की मांग से टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू जैसी कंपनियां मज़बूत स्थिति में हैं। इनके पास घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार दोनों में अच्छी पकड़ है।

जस्ता की मांग निर्माण और गैल्वनाइज्ड स्टील से जुड़ी है। इसलिए, जस्ता उत्पादन में बड़ी कंपनी वेदांता यहां भी एक प्रमुख खिलाड़ी है। हिंदुस्तान जिंक जस्ता उत्पादन में भारत की सबसे बड़ी और वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख खिलाड़ी है। निर्माण और गैल्वनाइज्ड स्टील की मांग बढ़ने से इसे स्थिर और मज़बूत लाभ मिल सकता है।

कुल मिलाकर, तांबा और अल्युमीनियम से जुड़ी कंपनियां 'ग्रोथ' की कहानी लिख रही हैं, स्टील इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बना हुआ है, और जस्ता अपनी जगह बनाए हुए है।

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