बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

बीते गुरुवार को चार खेल रत्न और 32 अर्जुन पुरस्कारों की घोषणा से खेल बिरादरी में जोश और उम्मीदें जागृत हुई हैं। यह मौका है भारत में वर्तमान खेल परिदृश्य पर गंभीरता से विचार करने का क्योंकि राजनैतिक दखलंदाजी और व्यावसायिकता ने खेल संस्कृति को गलत दिशा में मोड़ दिया है...

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भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की पहल कई चिंताएं पैदा कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव सुधारों के वास्तविक प्रयासों के बजाय ध्यान भटकाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है...

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"नानू, अनुमान लगाओ कि चौथा विश्व युद्ध कब शुरू होगा? कोई संभावना नहीं है प्रिय वीर! आने वाला विश्व युद्ध किसी को भी जीवित नहीं छोड़ेगा, जिससे तीसरा सीक्वल बन सके।"

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वर्ष 2025 हमें अधिकारों के शोरगुल से ऊपर उठकर कर्तव्य की शांत शक्ति को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। आकांक्षाओं से भरे राष्ट्र में, एक सामंजस्यपूर्ण समाज केवल एक सपना नहीं है, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए, अब अपने फोकस में बदलाव की आवश्यकता है। व्यक्तिगत अधिकारों से साझा दायित्वों की ओर तथा व्यक्तिगत लाभ की खोज से नागरिक गुणों की खेती की ओर चलने का समय आ गया है...

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भारत के हृदय में आगरा का शानदार शहर बसा है, जो इतिहास, रहस्य और आश्चर्य से भरा हुआ है। लेकिन, आगरा की खूबसूरती और वैभव के बीच एक सवाल है, जिसने इतिहासकारों और नागरिकों को हैरान कर रखा है, वह है कि आगरा का वास्तविक जन्म कब हुआ था? क्या आगरा शहर की जन्मतिथि तय करने, इसके अतीत के रहस्यों को उजागर करने तथा इसकी समृद्ध विरासत का जश्न मनाने की मांग करने का समय आ गया है...

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हिंदुत्व की राजनैतिक विचारधारा को सशक्त बनाने के लिए जातिवाद का मकड़जाल तोड़ना ही होगा। जाति व्यवस्था ने ऐतिहासिक रूप से भारत के विभिन्न समुदायों को हाशिए पर धकेल दिया है। इन जातिगत बाधाओं को कम करने की आवश्यकता केवल सामाजिक न्याय के बारे में नहीं है बल्कि यह हिंदुओं और हिंदुत्व विचारधारा के एकीकरण के लिए भी आवश्यक है।

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