हाइडलबर्ग को सलाम; पैसे, पढ़ाई और एक चुटकी रोमांस…

हमारी आरामदेह टूरिस्ट बस ने एक ही दिन में फ्रांस, बेल्जियम और नीदरलैंड के किनारे पार किए। रात तक हम जर्मनी के फ्रैंकफर्ट पहुंच चुके थे। न टैंक, न सैनिक, बस कैमरा, नाश्ता, गूगल मैप और उत्सुक भारतीय वरिष्ठ नागरिकों का एक जत्था।

खिड़की से दौड़ता यूरोप पोस्टकार्ड से अलग दिखता है। कोमल हरियाली, खाने-पीने वाले छोटे गांव, हवा में मंडराती पवनचक्कियां, और बीच-बीच में फैक्ट्रियां व गोदाम। रेलवे लाइनों, खेतों और कस्बों की अपनी-अपनी कहानियां हैं, महल और गिरजाघर ही सब कुछ नहीं बताते।

टेम्स, सीन, एम्स्टेल और नेकर, ये नदियां शहरों का दूसरा चेहरा दिखाती हैं। सड़क से आप शहर देखते हैं, नदी से उसका मूड। लंदन की गंभीरता, पेरिस की रोमांटिक छांव, एम्स्टर्डम की सहजता, और हाईडलबर्ग में नेकर के साथ पुराने मकानों की शान। साइकिलें, नावें और पतले-लम्बे मकान, सबको अपनी जगह चाहिए।

हमारी बस ने तीन देशों की सीमाएं पार कर दीं, बिना पूछताछ, बिना किसी पासपोर्ट के ड्रामे। पर असली ‘कूटनीति’ अंदर चली। मार्था ने यात्रियों से पलक झपकते ही फोटो-स्टॉप, सत्र और परिचय करवा दिए , “माइक लीजिए और अपने बारे में बताइए।” इतने दिन के सहयात्री अचानक परिचित बन गए।

एम्स्टर्डम की नहरों और साइकिलों के बाद फ्रैंकफर्ट आभासी तौर पर अलग दुनिया थी, तेज, व्यवस्थित और पैसे का शहर। यह यूरोप का वित्तीय केंद्र है, जहां बैंक और कारोबार का बोलबाला है। फिर भी, इसी शहर में गोएथे का जन्मस्थान है, यानी पैसा और साहित्य साथ-साथ चलते हैं। बहुसांस्कृतिक माहौल के कारण खाने की परवाह करने वाले भारतीयों के लिये फ्रैंकफर्ट का ‘रंगोली’ रेस्टोरेंट किसी राहत से कम नहीं था। भरपेट शाकाहारी भोजन और आखिर में बड़ा सा कटोरा कस्टर्ड का।

यूरोप में गर्मी अब बड़ी चिंता बनती जा रही है। ऊंची-ऊंची इमारतें, अरबों के बैंक मदद नहीं करेंगे जब छांव, पेड़ और खुले स्थान ज़रूरी हों। तापमान बैंक बैलेंस की परवाह नहीं करता, यही सबसे सादा सच है।

फ्रैंकफर्ट छोड़ते ही वातावरण बदल गया। ऊंची इमारतों की जगह पहाड़ियां और हरियाली। बस में सन्नाटा, फिर एक आवाज। “वो रहा हीडलबर्ग!” कैमरे फिर बाहर निकले। शहर ने शोर नहीं, शालीनता से परिचय दिया, हरी पहाड़ियां, पत्थर की गलियां, नेकर पर पुराना पुल और पहाड़ी पर बैठा हीडलबर्ग का किला। यहां इतिहास किताबों में बंद नहीं है; वह गलियों में चलता, पुलों पर ठहरता और नदी में अपना चेहरा देखता है।

फ्रैंकफर्ट आधुनिकता, पैसे और गिनती का शहर है; हाइडलबर्ग ज्ञान, इतिहास और थोड़े-से रोमांस का। शायद यही इन दोनों शहरों का जादू है। एक हाथ में बैंक का कैल्कुलेटर, दूसरे में कविता की पंक्ति। और, नेकर किनारे खड़ा हाइडलबर्ग धीरे से कहता है, “ज़िन्दगी सिर्फ बैलेंस शीट नहीं है, थोड़ा रोमांस भी ज़रूरी है।”