भारत के खेतों ने कृषि विकास को निरंतर जारी रखा है, लेकिन दीर्घकालिक उत्पादकता स्वस्थ मृदा और सुदृढ़ इकोसिस्टम पर निर्भर करती है। ‘पुनर्योजी कृषि’ मृदा की जीवन-शक्ति को बहाल करने, जैव-विविधता को बेहतर बनाने और जलवायु संबंधी दबावों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने का एक रास्ता प्रदान करती है।
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