समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

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एक दशक पहले, भारत के बिजली उत्पादन में सौर ऊर्जा का हिस्सा बहुत छोटा था। आज, यह देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा बनाती है। वर्ष 2014 में  लगभग तीन गीगावाट की स्थापित क्षमता से, इस क्षेत्र का विस्तार पचास गुना से भी अधिक हुआ है, और यह 30 जून तक 162.15 गीगावाट तक पहुंच गया...

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भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन पटरी पर उतार दी है। यह ट्रेन सबसे स्वच्छ ईंधन हाइड्रोजन का उपयोग करके स्वयं बिजली उत्पन्न करती है। उपयोग के समय इससे लगभग शून्य उत्सर्जन होता है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों को चलाने के तरीके में हुए विकास का एक नया अध्याय है, जो कोयले और भाप से स्वच्छ, अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत की व्यापक यात्रा को दर्शाता है...

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भारतीय रेल स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन के एक नए युग में प्रवेश कर रही है। हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी विश्व स्तर पर जीवाश्म ईंधन-आधारित कर्षण प्रणालियों के एक आशाजनक विकल्प के रूप में उभरी है। हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक स्वचालित इंजन है जो चलायमान रहते हुए हाइड्रोजन का उपयोग करके अपनी बिजली उत्पन्न करता है। 17 जुलाई को उद्घाटन के साथ, हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन का परिचालन शुरू हो गया। यह उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत खंड पर चलेगी।

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देश का अंतरिक्ष क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का प्रक्षेपण इस परिवर्तन का प्रतीक है...

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पूर्वोत्तर राज्य असम के कोयला क्षेत्र से बरामद जीवाश्म पत्तियों से पता चला है कि अपनी सुगंध के लिए प्रसिद्ध केवड़े का पौधा, जिसका उपयोग मिठाइयों, पारंपरिक चिकित्सा और मंदिरों में भी किया जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप में कम से कम 24 मिलियन वर्षों से अस्तित्‍व में है और भारत के प्राचीन उष्णकटिबंधीय जंगलों अब भी मौजूद है...

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यमुना किनारा मार्ग पर हाथी घाट से वाटर वर्क्स चौराहे तक प्रतिदिन बड़ी संख्या में नागरिक, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, बच्चे, पर्यटक तथा मॉर्निंग-ईवनिंग वॉक करने वाले लोग पैदल आवागमन करते हैं। दुर्भाग्यवश इस पूरे मार्ग पर सुरक्षित और व्यवस्थित फुटपाथ का अभाव है। तेज़ रफ्तार वाहनों के बीच पैदल चलना रोज़ जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है...

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