भारत अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन एशिया-प्रशांत के विकास और सफलता में एक केंद्रीय भूमिका में रहा है। साल 1960 में नई दिल्ली में आईसीए के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना से लेकर वैश्विक सहकारी आंदोलन में इसके निरंतर प्रभाव तक, भारत न केवल एक प्रमुख सदस्य रहा है, बल्कि सहकारी मॉडल को आकार देने में एक प्रेरक शक्ति भी रहा है, जिसका एशिया-प्रशांत क्षेत्र में गहरा प्रभाव पड़ा है।
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