ऐतिहासिक महत्व के कुण्ड की मूर्तियां अज्ञात स्थान पर ले जाने का आरोप

ज्ञापन देकर ब्रज फाउण्डेशन और संचालक विनीत नारायण के खिलाफ कार्यवाही की मांग

मथुरा। भारतीय बौद्ध महासभा के पदाधिकारियों ने आज जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपते आरोप लगाया कि एनजीओ ब्रज फाउण्डेशन के संचालक विनीत नारायण सौंदर्यीकरण के नाम पर रामताल के विशाल स्वरूप को संकुचित कर बौद्ध अवशेष का हिंदूकरण करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे रोका जाना जरूरी है। ज्ञापनदेने वालों का कहना है कि रामताल जो सुनरख बांगर में स्थित है, आरामताल के नाम से प्रसिद्ध यह जलाशय तमाम ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व संजोये हुये है। यह निश्चय ही सम्राट अशोक या जनपदकालीन पवित्र पुष्करणीय है जिसे भूमाफियों से बचाने के लिये समन्वित समाज विकास एवं सृजन समिति रामताल ने वर्ष 2004 से पूर्व ही प्रयास किया। यह जलाशय दो प्राचीन अंतर्राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य स्थित है। पहला चीन, भारत एवम अरब देशों से होते हुये यूरोपीय देशों तक जाता था जिसे ऐतिहासिक रूप से रेशम मार्ग के नाम से जाना जाता था। दूसरा अंतर्राष्ट्रीय राजमार्ग जो हिमायल से प्राचीन अहिछत्र ;बरेलीद्ध कुरूक्षेत्र, मथुरा, विधिसा से गुजरात अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह तक जाता था। रामताल कुण्ड जलाशय के उत्तर दिशा में बने हुये कुंए के मध्य होने के साक्ष्य मिले हैं जिसे चीनी यात्री फाहान ने अपनी यात्रा वृतांत में लिखा है जिसकी सीढियां जलाशय में उतरने के लिये मिली हंै और रेशम की रंगाई से संबंधित होने के प्रमाण भी यहां से मिले हैं। सम्राट अशोक के बाद की कुषाणकालीन तथागत गौतमबुद्ध की प्रतिमायें इस कुण्ड से खुदाई के दौरान मिली हैं। सम्राट अकबर अपने नवरत्न तानसेन के संगीत उस्ताद हरिदास के दर्शन की इच्छा लेकर वृन्दावन पधारे तो इसी तालाब पर आराम किया था, तभी से इसका नाम आरामताल पड़ गया। सम्राट की याद में यहां तीन कुंए खुदावाये और बगीचा लगवाया जिसके अवशेष आज भी हैं। सम्राट अकबर के समकालीन भक्ति कवि जगतनंद ने अपने ग्रंथ ‘ब्रज वस्तु वर्णन’ में तालाब की भव्यता का वर्णन किया है। उपरोक्त तालाब की सीढियां एवं भव्यता वर्तमान में ब्रज फाउण्डेशन ने सौंदर्यीकरण के नाम पर खण्डित कर दी हैं। ब्रज फाउण्डेशन सोची-समझी रणनीति के तहत जीर्णो(ार के नाम पर काल्पनिक एवं पौराणिक दंत कथाओं का वास्ता देकर इस राष्ट्रीय धरोहर को खुर्द बुर्द कर कब्जा कर रहा है। यहां कार्य करने वाले मजदूरों ने बताया कि खुदाई के दौरान तमाम मूर्तियां, सिक्के और पुरातत्विक महत्व की स्मृतियां मिली हैं जिन्हें ब्रज फाउण्डेशन के पदाधिकारी संग्रहालय में संरक्षण के नाम पर अज्ञात जगह ले गये हैं, क्योंकि यह राजकीय संग्रहालय में कहीं संरक्षित नहीं है। उन्होंने ब्रज फाउण्डेशन के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में बसपा पूर्व जिलाध्यक्ष किशोर कुमार, केपी सिंह, टीआर सिंह प्रभाकर, सुजान सिंह, जितेन्द्र सिंह, लुकेश राही आदि के हस्ताक्षर हैं।


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