सरिता बरारा जब मैं देखती हूं की आज भी मेरे गांव में बहुत से अभिभावक अपनी बच्चियों को स्कूल भेजने से इंकार करते हैं या बड़े-बूढ़े मेरी जैसी लड़कियों के लड़कों की तरह घर से बाहर खुले
सरिता बरारा जब मैं देखती हूं की आज भी मेरे गांव में बहुत से अभिभावक अपनी बच्चियों को स्कूल भेजने से इंकार करते हैं या बड़े-बूढ़े मेरी जैसी लड़कियों के लड़कों की तरह घर से बाहर खुले