मथुरा। पूर्व प्रधानमंत्री चैधरी चरण सिंह के 28वें निर्वाण दिवस पर आगरा के गाॅव नगला जोधना में स्मृति सम्मान, सप्ताहिक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम में चैधरी साहब के निकट सहयोगी रहे प्रोफेसर दुर्गपाल सोलंकी ने कहा कि हिन्दुस्तान की राजनीति में जो लोग नैतिक मूल्यों के लिए सदैव समर्पित रहें उस पक्ति में चैं0 चरण सिंह का नाम प्रथम पंक्ति में आता हैं। उन्होंने हमेशा अनुशासन को महत्व दिया व मानवीय दुख दर्द के प्रति कुसुम से कोमल थे। उन्होंने कहा कि चैंधरी चरण सिंह उन महापुरूषों में से है जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह भारत के तपें तपाये लोकप्रिय राजनेता थे। उन्होंने स्वाधीनता सग्राम में उल्लेखनीय योगदान दिया तथा ग्राम कृषि तथा सहाकरिता के क्षेत्र में ताकतवर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की नीतियों को स्पष्ट रूप से विरोध किया। श्री सोलंकी ने कहा कि यदि हम चैधरी साहब के आर्दशों और सपनों का भारत बनाना है तो देश में रोटी, कपड़ा और मकान जैसी समस्याओं का सामाधान कर एकता और अखण्डता को सुरक्षित रखना होगा। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए इतिहासविद् कुं0 अरूण प्रताप चमन ने कहा कि चैंधरी चरण सिंह आम आदमी की खुशहाली के समर्थक थे तथा सादगी के मिसाल थे। इसी का प्ररिणाम था कि उन्होंने मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक का पद सभाला। लेकिन किसान व गरीब से हमेशा जुडें रहे। प्रोंफेसर सुधीर प्रताप सोलंकी ने कहा कि चैंधरी चरण सिंह किसान क्रान्ति के जनक थे। उन्होंने सारा जीवन गान्धीवादी विचार धारा के साथ गुजरा। कार्यक्रम को अजीत सौलंकी, पीके राजोरा, डा0 दौलतराम चतुर्वेदी, अर्जुन चन्देल, शिव कुमार सिकरवार, अजीत कुमार, श्याम तौमर, हरेन्द्र कुमार, यतीश उपाध्याय, आदि ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वतंत्रता सेनानी चैं0 तेजसिंह वर्मा ने की।





