जो रस बरस रहयो बरसाने सो रस तीन लोक में नाय

बरसाना। जी हाॅं ब्रज में फाल्गुन मास में आने का कुछ अलग ही आनन्द है बरसाना की लठामार होली के दिन लाडली जी का मंदिर का नजारा कुछ अलग ही रहा। जो कि केसर अबीर गुलाल की खुश्बू से समूचा रगींली महल सहित बरसाना में लाखों की संख्या में आये श्रद्वालु भक्त इस अनोखी रंग गुलाल की होली को देख श्रद्वालु भक्त भाव विभोर हो उठे। इतना ही नहीं बल्कि देशी और बिदेशी श्रद्वालु भक्त भी इससे अछूते नहीं रहे। और जमकर होली का आनन्द लिया खूब अबीर गुलाल बर्षाया वहीं बरसाने की सखी हुरियारिनों से नन्द गाॅंव से बरसाना होली खेलने आये क्र्र्रष्ण के सखाओं ने होली खेली और बरसाने की हुरियारिनों के हाथों में लग रहीं लाठीयों से कृष्ण के हुरियारों की ढालों पर ख्ूाब लाठीयाॅ बर्षायी। और कृष्ण के हुरियारे ब्ज के रसिया सुनले ब्र्र्रषभान किशोरी जो मोते न खेली होली तौ तेरी मेरी कटटी फाग खेलन बरसाने में आये हैं नटबर नन्द किशोर गाते रहे और हुरियारिनों पर पिटते रहे।


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