मथुरा। अक्षयपात्र का दूषित दूध पीने के बाद गुरूवार बच्चों की तबियत खराब हो गयी जिसमें दो बच्चों की जान भी चली गयी। आज शुक्रवार जिलाधिकारी राजेश कुमार ने जिला अस्पताल पंहुचकर बच्चों के परिजनों से उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और डाॅक्टरों को निर्देश दिये कि इन बच्चों को वे बेहतर उपचार करें। उन्होंने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य में तीस फीसदी फायदा है। बच्चों के कल्चरल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पायेगा कि आखिर किस कारण से इन बच्चों की तबियत खराब हुयी है। उन्होंने बताया कि पचास बच्चे स्वर्ण जयंती अस्पताल में भर्ती हैं तथा 18 बच्चे जिला अस्पताल में अपना उपचार करा रहे हैं जिनका स्वास्थ्य पहले से कुछ बेहतर है। थोड़े समय के बाद यह बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ्य हो जायेंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि दूध के सैम्पल को जांच के लिये भेज दिया गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पायेगा कि किन कारणों से इन बच्चों का स्वास्थ्य खराब हुआ है। वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बनी पानी की टंकियों को खुलवाकर सफाई करायी गयी है तथा काशीराम आवासीय कालोनी में बनी टंकियों की भी सफाई करा दी गयी है। उन्होंने बताया कि एडीएम ई के नेतृत्व में एक जांच कमेटी का गठन किया गया है जो बीमार बच्चों के परिजनों एवम अक्षयपात्र तथा विद्यालय के कर्मचारियों के बयान दर्ज करेगी और इसमें जो दोषी पाये जायेंगे उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बताया कि काशीराम आवासीय कालोनी में अण्डरग्राउण्ड पड़ी पानी की पाइपलाइनों को भी दिखवाया जायेगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि सीवरेज के खराब पानी आने के कारण इन बच्चों का स्वास्थ्य खराब हुआ हो। उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पंहुचकर बच्चों के परिजनों से बातचीत की तथा अन्य मरीजों के भी हाल-चाल पूछे तथा अस्पताल से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी मरीजों से जानकारी ली।
काशीराम कालोनी में बच्चों के बीमार होने का सिलसिला जारी
मथुरा। काशीराम कालोनी में बच्चों के बीमार होने का सिलसिला अभी थम नहीं रहा है। यहां दूषित दूध पीने के दुष्प्रभाव के चलते एक दर्जन बच्चों को सरकारी एंबूलेंस के जरिये अस्पताल भेजा गया है। वहीं काशीराम कालोनी में हुये इस बड़े घटनाक्रम के बाद प्रशासन पूरी तरह चैकन्ना हो गया है। वहां खाने-पीने वाली वस्तुओं पर पूरी तरह पैनी नजर रखी जा रही है। जिलाधिकारी की सख्त हिदायत के बाद यहां बाहर से ठेल ढकेल लेकर खाद्य व पेय पदार्थ बेचने वालों पर भी पूर्णतः पाबंदी लगा दी गयी है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो तमाम बच्चे ऐसे हैं जिनको सरकारी मदद के रूप में विद्यालय में मिलने वाला दूध अभी भी इंफैक्शन कर रहा है। समाचार लिखे जाने तक यहां से भर्ती कराये गये बच्चों को नाम पता आदि की जानकारी नहीं मिल पायी है।





