दुर्लभ संगीत-सम्पदा के संरक्षण को आगे आयें भामाशाह: अरुण कुमार

  मथुरा । डाॅ0 राजेन्द्र कृष्ण संगीत महाविद्यालय एवं शोध-संस्थान के दुर्लभ देशी-विदेशी वाद्ययन्त्रों एवं विभिन्न भाषाओं के ग्रन्थों को देखकर मैं हतप्रभ हूॅं। इतना बड़ा संकलन करने में जीवन के चार दशक से भी अधिक का समय लगाया है संगीत-मनीषी डाॅ0 राजेन्द्र कृष्ण अग्र्रवाल ने। बहुत सारी सामग्री स्थानाभाव व सीलन के कारण नष्टप्राय हो चुकी है। समय रहते यदि इस दुर्लभ सम्पदा का संरक्षण न हुआ तो और भी बहुत सी सामग्री नष्ट हो सकती है, जिसके लिए हम सभी जिम्मेवार होंगे। यही नहीं, हम इन गू़़ढ़ वाद्ययन्त्रों की जानकारी से भी वंचित रह जायेंगे, जो डाॅ0 अग्रवाल के पास हैं, अतः संरक्षण हेतु भामाशाहों को आगे आना चाहिए।

  उक्त उद्गार अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त संस्था प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद के सचिव प्रख्यात् कानूनविद् श्री अरुण कुमार के हैं, जो उन्होंने डाॅ0 राजेन्द्र कृष्ण संगीत महाविद्यालय में व्यक्त किये।

 ज्ञात हो कि श्री अरुण कुमार विगत दिवस श्री बाॅंके बिहारी के दर्शन हेतु धर्मपत्नी माधुरी एवं सुपुत्र वैभव के साथ वृन्दावन पधारे थे। दर्शनों के उपरान्त सभी डाॅ0 राजेन्द्र कृष्ण के निवास संगीत सदन भी गये, जहाॅं शाॅल व पटुका, स्मृति-चिह्न आदि भेंटकर सभी का भव्य स्वागत डाॅ0 राजेन्द्र कृष्ण सहित आलोक, एकता व शिप्रा द्वारा किया गया। स्वागत के उपरान्त सभी डाॅ0 अग्रवाल के विद्यालय भी गये जहाॅं उन्होंने डाॅ0 अग्रवाल द्वारा संगृहीत दुर्लभ संगीत-सम्पदा का अवलोकन किया और उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।


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