मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे चतुर्थ वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला के पहले दिन राष्ट्रीय उपदेशक द्वय सतीश चन्द्र व डा. करुणा कान्त ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित किया।
सतीश चन्द्र ने बाबा जयगुरुदेव महाराज के सत्संग वचनों को स्मरण कराते हुये कहा कि उस परमात्मा ने इस मनुष्य शरीर को अपनी जीवात्मा को जगाने के लिये दिया है। श्वांसों की पूंजी मिली हुई है, इसे मुख से निकालो या नाक से। ये जहां आप रहते हो ये जमीन आप की नहीं है और न ये शरीर ही आप का है। सब के सब चाहे चक्रवर्ती राजा ही क्यों ही न हो चले जायेंगे। इन दोनों आंखो से दिखाई देने वाली कोई भी चीज आप की मदद नहीं करेगी। ये काल का देष है। डा. करुणाकान्त ने बताया कि ईश्वर ने जितना अधिकार मनुष्यों को दिया है, उतना किसी के पास नहीं है। मनुष्य को अच्छे-बुरे कर्म करने की पूर्ण आजादी है। मनुष्य अपने शारीरिक बल, धन, दौलत, पद आदि के अहंकार में ईश्वर को भूल जाता है और बुराइयों में लिप्त हो जाता है। जीवन का कीमती समय निकल जाता है। इसलिये लोगों को वक्त के रहते किसी सन्त सतगुरु की शरण ले लेनी चाहिये। संसार के कामों को मेहनत-ईमानदारी से करना चाहिये। किसी भी प्रकार की जीव हिन्सा नहीं करनी चाहिये।






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