मथुरा। बढ़ते प्रदूषण के कारण धूमपान नहीं करने वाले भी दमा के शिकार हो रहे हैं। खास बात यह है कि यह रोग अब कम आयु वर्ग में भी होने लग गया है। पहले दमा रोग 40 वर्ष की उम्र के बाद देखा जाता था, जो अब 30 वर्ष के युवाओं में भी नजर आ रहा है। यह खुलासा जनपद के एक मात्र केडी मेडिकल कालेज, हाॅस्पीटल एवं रिसर्च सेंटर के एलर्जी एवं चेस्ट रोग विभाग में विश्व दमा रोग दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों की चर्चा के दौरान हुआ। संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए केडी हाॅस्पीटल के एलर्जी एवं चेस्ट विशेषज्ञ डाॅ. राजेश कुमार ने कहा कि दमा रोगियों के प्रति जाग्रति लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पहले समय में यह बीमारी ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक के लोगों में पाई जाती थी लेकिन अब यह बीमारी प्रदूषण के कारण युवाओं में बढ़ती जा रही है। इस बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डाॅ. राजेश ने बताया कि एक ट्रेफिक पाइंट पर खडे़ रहने वाले पुलिस कर्मियों में ज्यादा पाई पाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के दौरान मरीज की लगातार खांसी, श्वांस का फूलना, बलगम बनना आदि प्रमुख लक्षण होते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ड्यूटी करते समय ट्रेफिक पुलिस के जवानों को मास्क लगाना चाहिए, उनकी ड्यूटी बदलते क्रम में लगानी चाहिए, समय समय पर चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। अपने वाहनों की समय-समय पर जांच करानी चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरके ग्रुप के चेयरमैन डाॅ. रामकिशोर अग्रवाल, निदेशक मनोज अग्रवाल ने बताया कि यह सुविधा केडी मेडिकल कालेज में सस्ते दरों पर उपलब्ध है। इसका लाभ मरीजों को लेना चाहिए। सर्जरी विभाग के एचओडी डाॅ. दिवाकर मित्तल, स्त्री एवं बाल रोग विभाग की एचओडी डाॅ. उषा वत्स, डाॅ. हसना हना चैधरी, हड्डी रोग विभाग के डाॅ. डीआर गलफत, डाॅ. मनोज मलिक, डाॅ. केके गुप्ता, नेत्ररोग विशेषज्ञ डाॅ. दीन दयाल, बालरोग विभाग के डाॅ. डीके जुनेजा ने भी विचार व्यक्त किए।





