
उच्चतर न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति में विलंब के लिए लगातार कार्यपालिका को जिम्मेदार ठहराने और उसपर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करने के लग रहे आरोपों के बीच एक संसदीय समिति ने देश के प्रधान न्यायाधीश और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल एक साल से अधिक समय का निर्धारित करने की सिफारिश की है। समिति की इस सिफारिश पर यह सवाल उठना स्वाभाविक होगा कि आखिर देश की स्वतंत्र न्यायपालिका के इतिहास में अभी तक कभी ऐसा महसूस क्यों नहीं किया गया और अब इस तरह का सुझाव संसदीय समिति ने क्यों दिया?






Related Items
प्रधान पति पर अज्ञात हमलावरों का हमला, मारी गोली
इन्होंने राजकोट टेस्ट को बताया अपने कार्यकाल का...
SBI : अरूंधती भट्टाचार्य का कार्यकाल बढा