बल्देव। बृज के राजा ठा श्री दाऊजी महाराज का 435 वाॅ पाटोत्सव मन्दिर प्रांगण में धूमधाम के साथ मनाया गया इसके साथ ही बल्देव का अगहन पूर्णिमा मेंला भी शुरू हो गया। इस अवसर पर मन्दिर प्रांगण में प्रातः वैदिक मंत्रांेच्चारण के साथ श्रीदाऊजी महाराज एवं माता रैवती जी का विषेश अभिषेक हुआ। इसके पश्चात विशेष श्रृगंार धारण कराया गया। इसके साथ ही दाऊजी महाराज को सर्दी से बचाव को गर्म वस्त्र, रजाई आदि धारण कराये गये। इसी कारण पूर्णिमा को गद्दल पूर्णिमा कहा जाता है। पाटोत्सव के उपलक्ष्य में मन्दिर प्रांगण को आर्कषक ढंग से सजाया गया था। नफीरी की स्वर लहरियाॅ भक्तों को थिरकने पर मजबूर कर रही थी। मन्दिर में 51 ब्राह्मणों द्वारा बलभद्र सहस्त्रनाम का पाठ किया गया। मन्दिर प्रांगण में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ दाऊजी महाराज व रैवती मईया के जयकारों से वातावरण को गुजायमान कर रहे थे। भक्त गण अपने ईष्ट देव को माखन मिश्री का भोग लगा कर मनौतियां माग रहे थे। देर रात्रि तक दर्शनों को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही।





