मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में दलितों का अवैध कब्जा बना बाधक

परिक्रमा के कच्चे फुटपाथ पर ही कर डाला दलितों ने पक्के मकान का निर्माण

परिक्रमा के कच्चे फुटपाथ से परिक्रमा करते परिक्रमार्थियों के पीछे दिखाई दे रहा दलितों का अवैध कब्जा

गोवर्धन। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजक्ट गिरिराज परिक्रमा के कच्चे रास्ते के चैड़ीकरण कार्य को पलीता दिखाकर यहां दलित जाति के लोगों ने परिक्रमा के पूरे कच्चे फुटपाथ पर ही अपने पक्के मकान का निर्माण कर डाला है खुलेआम दलितों द्वारा दी गयी इस चुनौती का सरकार के मातहत भी सामना नहीं कर पाये। शासन प्रशासन ने कच्चे रास्ते के निर्माण के लिये जहां पूरे परिक्रमा मार्ग में व्यापक स्तर पर तोड़ फोड़ कर चैड़ीकरण किया गया। लेकिन यहां पूरी तरह अवैध कच्चे फुटपाथ पर ही बने इन दबंग दलितों के मकान को जानबूझ कर अनदेखा कर गये। इतना ही नहीं इन दलितों ने अब आगे के कच्चे फुटपाथ पर भी बुर्जी बिटौरा आदि बनाकर कब्जे को फैलाने का प्रयास आरम्भ कर दिया है। वहीं दलितों द्वारा दबाये गये फुटपाथ के पीछे सड़क किनारे स्थित भूस्वामी भी दलित होने के चलते इस अवैध कब्जे को विरोध करने की बजाय अपनी पूरी सहमति दे रहे है।

विदित हो कि सूबे की सपा सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने गिरिराज धाम गोवर्धन और गिरिराज महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा को अपना ड्रीम प्रोजक्ट घोषित कर यहां के चहुंमुखी विकास में अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। मुख्यमंत्री के इसी ड्रीम प्रोजक्ट के चलते यहां के सप्तकोसीय परिक्रमा मार्ग में बने कच्चे परिक्रमा मार्ग के फुटपाथ का चैड़ीकरण कार्य किया गया। लेकिन प्रदेश मंे पूर्व मंें सत्तारूढ़ रही बसपा सरकार की वोट बैंक कहे जाने वाले दलित समुदाय के लोग यहां इसमंे बाधक बन रहे है। गिरिराज परिक्रमा मार्ग के अन्तिम चरण में राधाकुण्ड से लौटते समय रास्ते में स्थित नगला सांखी में सरकारी स्कूल के सामने स्थित कच्ची परिक्रमा मार्ग के फुटपाथ पर यहीं के दलित जाति के दबंग लोग रोशन सिंह, कन्हैया लाल आदि ने अपनी जाति का फायदा उठाकर इस कच्चे फुटपाथ पर अवैध कब्जा कर इस पर अपने पक्के मकानों का अवैध निर्माण कर डाला है। पूरी तरह परिक्रमा मार्ग के कच्चे फुटपाथ पर बने इस मकान से इन दलितों ने सपा सरकार के चैड़ीकरण कार्य को न सिर्फ खुलेआम चुनौती दी है बल्कि स्थानीय सामाजिक लोगों के साथ साथ शासन प्रशासन के लोगों को भी जाति विषयक मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी है। अभिशाप की जगह इनके लिये अब वरदान और हथियार बन चुकी जातिगत विशेषता के चलते शासन प्रशासन के साथ साथ कार्यदायी ठेकेदार और स्थानीय सामाजिक लोगों में से किसी ने भी इनसे पंगा लेना उचित ही नहीं समझा। वहीं कार्यदायी ठेकेदारों ने भी विवादों में फंसने की बजाय आनन फानन में अपने काम को अंजाम दे डाला। जबकि शासन प्रशासन ने समूचे परिक्रमा मार्ग मंे व्यापक स्तर पर सभी के कच्चे पक्के स्थायी अस्थायी अतिक्रमण हटाकर कच्ची परिक्रमा के चैड़ीकरण कार्य को अंजाम दिया था लेकिन इन दबंग दलितों के इस तथाकथित आशियाने के आगे वे भी नर्वस होकर गुजर गये और उनकी भी एक न चली। यहीं के कुछ स्थानीय सूत्रों की माने तो बसपा सरकार में उनकी पहुंच के कई बड़े अधिकारी और नेता वर्तमान की सपा सरकार मंे भी महत्वपूर्ण स्थान बनाये हुये है। इन्ही की सिफारिशों से इन्होने मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में अडंगा लगाया हैै और इन्ही के बल पर ये किसी से भी उलझने को तैयार रहते हैै। वहीं सड़के के इस कच्चे फुटपाथ के सहारे स्थित जमीन के स्वामी भगवती प्रसाद को जहां इनका विरोध कर इन अवैध कब्जों को हटवाना चाहिये था वे भी दलित जाति के होने के कारण इन्हें भरपूर संरक्षण दे रहे है और कभी भी इनका विरोध करना तो दूर उल्टे इन अतिक्रमणकारियों के साथ पैरवी करने चले आते है। अपने इन्हीं दबंग हौसलों के सामने शासन प्रशासन सहित सभी को पस्त होता देख इनके हौसले और भी बढ़ गये है। इन्होंने अब आगे के कच्चे परिक्रमा मार्ग पर कब्जे के प्रयास आरम्भ कर दिये है और आगे के कच्चे परिक्रमा मार्ग पर बुर्जी, बिटौरे, निजी घूरा, ट्रैक्टर आदि का स्टैण्ड आदि तरह तरह के सामान आदि डालकर कब्जा करने के प्रयास आरम्भ कर दिये है। 


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