दूसरे दिन प्रवचन करते जैन मुनि तरूण सागर महाराज
कड़वे प्रवचन के दूसरे दिन जैन मुनि तरूणसागर ने कहा
मथुरा। चार दिवसीय कड़वे प्रवचन सत्संग के दूसरे दिन आज राधानगर पार्क में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुये क्रांतिकारी संत जैनमिश्री तरूणसागर ने कहा कि रूपया पैसा चला जाये तो परेशान न होना। जमीन जायदाद चली जाये तो परेशान मत होना। लड़का चला जाये तो परेशान मत होना बस गुजारिश है कि अपने चेहरे की मुस्कुराहट मत जाने देना। क्योंकि मुस्कुराहट रहेगी तो सब तुम्हारे इर्द-गिर्द रहेंगे और मुस्कुराहट चली गयी तो सब होते हुये भी सब छोड़कर चले जायेंगे। मुस्कुराते रहिये, क्योंकि मुस्कुराहट का फैशन कभी आउट आॅफ डेट नहीं होता। उन्होंने कहा कि आदमी व्यवहारिक सच्चाई को तो याद रखता है लेकिन वास्तविक सच्चाई को भूल जाता है। यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि दुनिया में अमृत की मात्रा बहुत कम रह गयी है। कड़वे घंूट पीना है फिर भी मुस्कुराते हुये जीना है। उन्होंने बताया कि चार बातों का हमेशा चिंतन करो। एक दिन सब कुछ छोड़कर खाली हाथ जाना है, जो भाग्य में है वह कहीं नहीं जा सकता और जो चला गया समझो वह भाग्य में था ही नहीं। मां-कबाप पहली पूजा है उनका कभी दिल नहीं दुखानां जीते ही ऐसे सत्कर्म जरूर कर लेना कि मृत्यु के बाद तुम्हारी आत्मा की शांति के लिये किसी और को भगवान से प्रार्थना न करनी पड़े।
जैन मुनि ने कहा कि सुखी जीवन के लिये सुनने की आदत डालो क्योंकि कहने वाले कहने से बाज नहीं आने वाले। अगर सुनने की आदत नहीं डाली तो यह दुनिया तुम्हें जीने नहीं देगी। मुनिश्री ने बताया कि चूहा भी कपड़ा काटता और दर्जी भी कपड़ा काटता है। चूहा कपड़े को काटता है तो कपड़े का बंटाधार हो जाता है और जब दर्जी कपड़ा काटता है तो कपड़े का उद्धार हो जाता है। इसी तरह कोई तो जीवन को तमाशा बनाकर जीता है और कोई जीवन को तीर्थ बनाकर जीता है।





