
पारम्परिक लोक वाद्य ढाक के साथ नृत्य
सन्त प्रवर श्री स्वामी गुरुषरणानन्द जी महाराज से रमणरेती आश्रम में इस वर्ष षारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में दुर्गा पूजा का विषेष अनुष्ठान सम्पन्न होगा।
दुर्गा पूजा अनुष्ठान के लिए कोलकाता से आये षिल्पकारों द्वारा , माँ लक्ष्मी, कार्तिक गणेष तथा महिषासुर की विषाल मूर्तियों का निर्माण किया गया है।
नवरात्र में 30 सितम्बर से 3 अक्टूबर तक स्वामी गुरुषरणानन्द जी महाराज के सानिध्य में आयोजित अनुष्ठान के अन्तर्गत आश्रम स्थित नवगृह मन्दिर के पीछे बेल वृक्ष के नीचे देवी दुर्गा जी के आवाहन और पूजन से कार्यक्रम का षुभारम्भ होगा ।
कार्यक्रम के अन्तर्गत 1 अक्टूबर को यमुना तट से माँ दुर्गा जी का डोला प्रारंभ होगा जो ठाकुर रमण विहारी लाल जी के मन्दिर की परिक्रमा के पष्चात् आयोजन स्थल पर समाप्त होगा और यहाँ निर्मित मंच पर मूर्ति प्रतिष्ठा होगी एवं विधि विधान पूर्वक दुर्गा जी का सप्तमी पूजन तथा कलष स्थापना की जायगी। अगले दिन 2 अक्टूबर को प्रातः अष्टमी पूजा एवं सन्धि पूजा , दोपहर को भोग - आरती तथा चण्डी पाठ और सायंकाल भोग आरती के कार्यक्रम सम्पन्न हांेगे।
कार्यक्रम के तीसरे दिन 3 अक्टूबर को प्रातः नवमी पूजन, हवन, अपराजिता पूजन और कलष विर्सजन किया जायगा।
अनुष्ठान का समापन 4 अक्टूबर को मूर्ति- विसर्जन के साथ होगा। अनुष्ठान को षास्त्रीय विधान से सम्पन्न कराने के लिए कोलकाता से विद्वान आचार्य रमणरेती आयेंगे और आश्रम में सेवारत काष्र्णि ब्रज चैतन्य तथा गौरांग चक्रवर्ती उनके विषेष सहयोगी होंगे।
दुर्गा पूजा के इस अनुष्ठान का विषेष आकर्षण होगा बंगाल के लोक वाद्य ’ ढाक ’ वादन के साथ देवी जी के भक्तजनांे द्वारा भक्ति- विभोर होकर किये जाने वाला नृत्य ।
दुर्गा पूजा के इस अनुष्ठान के अवसर पर रमणरेती में बड़ी संख्या में विभिन्न स्थानों से आये महाराज श्री के भक्त जन उपस्थित रहेगे।






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