
मथुरा। लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करें। यहां से इस आदत को जीवन में उतारें, अनुशासित रहें। बड़ों से अच्छी बातें सीखें, अपने प्रोफेशन पर गर्व करना सीखें। आपका भविष्य उज्जवल रहेगा। उक्त विचार उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान के कुलपति प्रो0 सी0 वाष्र्णेय ने वेटरिनरी काॅलेज में प्रवेश पाने वाले प्रथम बीवीएससी एण्ड ए एच के नवागत छात्र एवं छात्राओं से कहे। उन्होंने कहा कि वेटरिनरी प्रौफेशन कई देशों में अग्रणी प्रोफेशन है। मेडीकल में लगभग 12 वर्ष बिताने के बाद कहीं छात्र लीडिंग फिगर में आता है, जबकि वेटरिनरी साइंस से यह मुकाम केवल सात वर्ष के परिश्रम से भी प्राप्त किया जा सकता है। प्रो. वाष्र्णेय ने बताया कि पशु चिकित्सक अब विविध प्रकार से अपना जोब सुरक्षित कर सकता है। सेना, पैरा मिलिट्री फोर्सेज, शिक्षण संस्थान, मीट एवं अण्डा उद्योग, प्रदेश सरकार में वेटरिनरी आॅफीसर, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी संस्थाओं के अलावा स्वयं का क्लीनिक खोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय से कक्षाओं में पहुंचे। रेंिगंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। जो भी इस दिशा में कतिपय गड़बड़ी करेगा, उसे पनिश किया जाएगा। कुलपति ने इस मौके पर नवागत छात्रों को वर्ष 1947 से शुरू हुए वेटरिनरी काॅॅलेज के स्वर्णिम इतिहास की जानकारी भी संक्षिप्त रूप से दी। इससे पूर्व वेटरिनरी कालेज के अधिष्ठाता प्रो. एसके गर्ग ने नवागत छात्रों को विद्यालय की दिनचर्या एवं शिक्षण की जानकारी दी। प्रोे. गर्ग ने कहा कि किसी भी परेशानी में छात्र शिक्षक, वार्डन एवं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों को संपर्क कर सकता है। शिक्षक हर संभव मदद को तैयार रहेंगे। उन्होंने बताया कि छात्र एवं छात्राएं अपने परिवार का नाम रोशन करें। छात्रों ने अपना-अपना परिचय देकर प्रवेश से पूर्व किए जाने वाले प्रयास एवं अपनी हाॅबियों के बारे में बताया। छात्रों की संपूर्ण व्यवस्थाओं में डीएसडब्लू डा.एके मदान, डा.बरखा शर्मा, डा.दिलीप श्वाइन, डा. जितेंद्र कुमार आदि ने छात्रों को हर दिन के क्रिया कलापों एवं यहां की परंपराओं के बारे में अवगत कराया।






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