विरह और वेदना में डूबी बेटी का उभरा दर्द
ब्रज की गायकी को ऐसे ही मिले संबल
दीनदयाल धामः आधुनिकता की चकाचैंध भरे संगीत के दौर में विलुप्त होने के कगार पर खडे़ ब्रज की लोकगीत गायकी को संबल मिला तो विरह, वेदना और उलाहना से गुजरता संगीत कार्यक्रम लोकगीतों की मस्ती में डूब गया।
अंत्योदय उपासक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली में लोक संगीत कार्यक्रम में महिलाओं ने मांगलिक और धार्मिक उत्सवों पर गाए जाने वाले लोकगीत गाए तो श्रोता झूम उठे।
महिला और बालिका वर्ग की इस प्रतियोगिता का शुभारंभ संध्या शर्मा और मेला समिति अध्यक्ष विघायक जगन प्रसाद गर्ग ने संयुक्त रुप से पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर दीप जलाकर किया। शादी के दौरान विदाई, बाबुल से बिछोह और ससुराल में विरह के गीत जब यहां गाए तो माहौल खुशी के साथ व्याकुल भी हो उठा। रीना सिंह ने- आय गए आ गए भवन में दीनदयाल, नगर में शोर भयौ... सुनाकर माहौल को मस्त कर दिया। काजल वर्मा ने मेरे खो गये दीनदयाल, ढूंढ लाओ नर-नारी सुनाकर श्रोताओं में भाव पैदा किया। पूजा, भारती और अन्नू ने खूब मनेंगी खुशियां आज धाम में रतिया गाकर माहौल को खुश कर दिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डाॅ. निर्मला सिंह और विशिष्ट अतिथि पूर्व मेयर बेबीरानी मौर्य, मंजू गुप्ता, सीमाजी, मीरा कस्तूरिया, वंदना यादव, सुमन शमा, कमलेश चैहान थीं। कार्यक्रम में सीमा सारस्वत, नंदाजी, शारदाजी, चंद्रकला यादव, सुषमा दीक्षित, शशी और कुषमा दीक्षित और सीमा सारस्वत आदि मौजूद रहीं। नियार्णक सुन्नदा उपाध्याय रहीं।





