
डीएस मलिक
भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2014-15 में वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई) के दोबारा शुरू करने को घोषणा की थी।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना से सीमित साधनों वाले समाज के कमजोर तबके को लाभ मिलेगा क्योंकि इससे देश के वरिष्ठ नागरिकों को 500 से 5000 रुपये प्रतिमाह तक मासिक पेंशन उपलब्ध होगी।
वीपीबीआई योजना से लाभार्थी को अपनी जमा राशियों पर 9.38 प्रतिशत प्रतिवर्ष की समग्र दर पर आय प्राप्त होती है जिसका मासिक आधार पर भुगतान किया जा रहा है।
वरिष्ठ नागरिक विशेष रूप से देश में बढ़ती दीर्घायु की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। दीर्घायु में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इस योजना के लिए अंशदान से 10000 करोड़ रुपये से अधिक की संचित निधि जुटने की संभावना है जो देश के विकास के लिए संसाधन जुटाने का महत्वपूर्ण साधन भी होगी।
दोबारा शुरू की गई इस वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई) योजना के तहत वरिष्ठ नागरिक को मासिक या वार्षिक आधार पर एक निश्चित पेंशन मिलेगी जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध होगी।
केवल एलआईसी को इस योजना के क्रियान्वयन का विशेषाधिकार दिया गया है।
पेंशन भोगी के जीवनकाल में उसके द्वारा चुने गए पेंशन लेने के तरीके के आधार पर तत्काल वार्षिकवृत्ति के रूप में पेंशन का भुगतान किया जाएगा। किसी पेंशन भोगी की मृत्यु होने पर क्रय मूल्य का भुगतान किया जाएगा।
योजना में न्यूनतम प्रवेश आयु – 60 वर्ष (पूरे) है और अधिकतम प्रवेश आयु की कोई सीमा नहीं है।
न्यूनतम पेंशन 500 रुपये प्रति माह होगी और अधिकतम 5000 रुपये प्रति माह रहेगी।
पेंशन की अधिकतम सीमा एक पूरे परिवार के लिए है अर्थात इस योजना के तहत सभी पॉलिसियों के तहत इस परिवार को जारी कुल रकम अधिकतम पेंशन सीमा से बाहर नहीं होगी। इस प्रयोजन के लिए परिवार में पेंशनभोगी, उसकी पत्नी/ उसका पति, आश्रित शामिल हैं।
इस योजना को एकमुश्त खरीद मूल्य का भुगतान कर खरीदा जा सकता है। पेंशन भोगी के पास को यह विकल्प रहेगा कि वह या तो पेंशन की राशि या खरीद मूल्य का चयन करे।
पेंशन का भुगतान मासिक, तिमाही, अर्द्ध-वार्षिक तथा वार्षिक तौर पर किया जाएगा। पेंशन का भुगतान ईसीएस/एनईएफटी द्वारा ही किया जाएगा।
पेंशन की पहली किश्त को खरीद की तारीख से एक माह, तीन माह, छः माह, एक वर्ष के पश्चात पेंशन भुगतान के तरीके के आधार पर क्रमशः वार्षिक, अर्द्ध-वार्षिक, तिमाही, या मासिक तौर पर दी जाएगी।
पंद्रह वर्ष पूरे हो जाने के बाद पॉलिसी का अभ्यर्पण किया जा सकता है। अदा किए जाने वाला अभ्यर्पण़ मूल्य खरीद मुल्य का रिफण्ड होगा। हालांकि अपवाद की स्थितियों में, पेंशन भोगी को खुद की या उसके पति/पत्नी की किसी गंभीर/टर्मिनल बीमारी के इलाज के लिए पॉलिसी को 15 वर्ष पूर्ण करने से पहले अभ्यर्पित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अदा किए जाने वाला अभ्यर्पण मूल्य खरीद मूल्य का 98 प्रतिशत होगा।
तीन पॉलिसी वर्ष पूरा करने के पश्चात ऋण सुविधा मुहैया की जाएगी। इसके तहत अधिकतम ऋण, खरीद मूल्य का 75 प्रतिशत दिया जाएगा।
ऋण राशि के लिए वसूल की जाने वाली ब्याज की दर समय-समय पर निगम द्वारा निर्धारित की जाएगी।
पॉलिसी के अंतर्गत देय पेंशन की राशि में से ऋण का ब्याज वसूल किया जाएगा। पॉलिसी के तहत पेंशन भुगतान की निरंतरता के अनुसार ऋण पर ब्याज लगेगा तथा यह पेंशन की देय तारीख पर देय होगा। हालांकि, बकाया ऋण एग्ज़िट के समय दावे की राशि से वसूल किया जाएगा।
सर्विस कर समेत यदि कोई कर हों तो वह कर कानून के अनुसार देय होंगे तथा कर की दर समय-समय पर लागू किए गए दर के अनुसार होंगी।
पॉलिसी धारक द्वारा खरीद मूल्य पर विद्यमान दरों के अनुसार कर अदा किया जाएगा। चुकाए गए कर की राशि को योजना के तहत देय हितों की गणना के लिए विचार नहीं किया जाएगा।
पॉलिसी धारक पॉलिसी की शर्तों के प्रति संतुष्ट न होने पर पॉलिसी प्राप्त करने की तारीख से 15 दिन के भीतर इसका कारण बताते हुए निगम को पॉलिसी वापस कर सकते हैं। निःशुल्क दर्शन अवधि के भीतर रिफण्ड की राशि पॉलिसी धारक द्वारा जमा किए गए खरीद मूल्य में से स्टॉप ड्यूटी के प्रभार को काटते हुए दी जाएगी।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
• 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों के लिए
• पेंशन मासिक, तिमाही, अर्द्ध-वार्षिक या वार्षिक तौर पर तत्काल वार्षिक वृत्ति के आधार पर होगी। जो क्रमशः रु.500 से 5000 के बीच (मासिक), रु.1500 से 15000 (तिमाही), रु.3000 से 30000 (अर्द्ध-वार्षिक) तथा रु.6000 से 60000 (वार्षिक) ये अंशदान की गई राशि तथा चुने गए विकल्प के आधार पर होंगी।
• मासिक अदायगी आधार पर नौ प्रतिशत का रिटर्न देने का आश्वासन दिया गया है। जो 9.38 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न बनता है।
• पॉलिसी की शुरुआत की तारीख से तीन वर्ष के बाद इस पर ऋण (अंशदान की गई राशि का 75 प्रतिशत तक) लिया जा सकता है।
• मृत्यु होने पर नामिति को पूरा खरीद मूल्य रिफण्ड किया जाएगा।
• 15 वर्ष बीत जाने के बाद अभ्यर्पण/एग्ज़िट की अनुमति दी जाएगी। खुद की या उसके पति/पत्नी की गंभीर/टर्मिनल बीमारी की विशेष परिस्थितियों में इससे पहले भी अनुमति दी जा सकती है।
• इसका भुगतान ईसीएस या एनईएफटी के माध्यम से होगा।
(लेखक पीआईबी नई दिल्ली में अपर महानिदेशक हैं)






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