वस्‍तु एवं सेवा कर : भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बन सकता है मील का पत्थर

122वां संविधान संशोधन भारत के राजनैतिक-आर्थिक इतिहास में मील का पत्‍थर साबित होगा क्‍योंकि इस क्रांतिकारी कदम से देश को वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में अब तक का सर्वाधिक प्रगतिशील कर सुधार प्राप्‍त हो रहा है।122वां संविधान संशोधन भारत के राजनैतिक-आर्थिक इतिहास में मील का पत्‍थर साबित होगा क्‍योंकि इस क्रांतिकारी कदम से देश को वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में अब तक का सर्वाधिक प्रगतिशील कर सुधार प्राप्‍त हो रहा है। इससे एक तरफ कारोबार और उद्योग के लिए आसानी होगी, वहीं दूसरी तरफ सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह होगी कि उपभोक्‍ताओं के लिए वस्‍तुओं और सेवाओं की कीमत में कमी आएगी। इस कदम से केंद्र और राज्‍यों को राजस्‍व में किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं होगा। इसके अलावा जीएसटी से ऐसी कर व्‍यवस्‍था वजूद में आएगी जिससे सकल घरेलू उत्‍पाद में एक से डेढ़ प्रतिशत का इजाफा होगा और करों के मकड़जाल से मुक्ति मिलेगी। (Read in English)


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