मथुरा। हिन्दी प्रचार सभा के तत्वावधान में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर एक साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित साहित्यकार डा. नटवर नागर के शोध प्रबंध हिन्दी प्रहसन उद्भव एवं विकास का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पं. बसंत शास्त्री ने वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण से किया। कवि रवीन्द्र पाल सिंह रसिक ने मां शारदा की वंदना प्रस्तुत की। शोध ग्रंथ के लेखक डा. नटवर नागर ने शोध ग्रंथ के संबंध में बताते हुए कहा कि नाट्य के दस रूपों में प्रहसन का स्थान श्रेष्ठ है, यह सामाजिक परिष्कार का माध्यम है। आज के समय में प्रहसन की प्रासंगिकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक अजय कुमार पोईया ने अटलबिहारी वाजपेयी के दीर्घजीवन और सुस्वास्थ्य की कामना की और कहा कि डा. नटवर नागर ब्रज की विभूति हैं, उनका शोध कार्य हिन्दी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा। इस अवसर पर डा. ताराचंद शर्मा, हरीबाबू कौशिक, मधुकर नागर, राजकुमार गुप्ता, डा. दिनेश पाठक, उपेन्द्र त्रिपाठी, चन्द्रशेखर शर्मा, श्यामपाल, आरके त्रिपाठी, डा. एसपी सिंह, शैलेन्द्र कुलश्रेष्ठ, देवकिशन शर्मा, मयूर कौशिक, देवेन्द्र पाल आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नीरज शास्त्री ने अपनी मृदुवाणी में किया।





