मथुरा। केन्द्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने आज पीडब्ल्यू डी गैस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहा कि करीब 28 माह से जवाहरबाग पर कब्जा करे सपा के गुण्डों के साथ यदि सख्ती बरती जाती तो आज इस तरह की घटना न घटती। हमारे दो होनहार अधिकारी इन उपद्रवियों के हाथों मारे गये। इसका हमें भारी दुख है। जवाहरबाग में रसद और सोलर प्रोजेक्ट के लगाये जाने के पीछे सरकार के किसी बड़े मंत्री का हाथ है। यदि सरकार का संरक्षण न होता तो जवाहरबाग कब का खाली हो गया होता। 4 मार्च 1994 को एक दिन की परमीशन लेकर जवाहरबाग में ये उपद्रवी रूके थे लेकिन परमीशन खत्म होने के बाद जिला प्रशासन का दायित्व बनता था कि वे जवाहरबाग को खाली करायें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि इसके पीछे उन्हें प्रदेश सरकार का डर था। जवाहरबाग की जमीन हथियाने में सरकार शामिल है। कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आयी है। उन्होंने कहा कि घटना को चार दिन होने के बाद भी सरकार का एक भी नुमाइंदा यहां नहीं आया। घटना के आरोपी रामवृक्ष यादव को मरा हुआ दर्शाया गया है लेकिन उसका कोई शव आज तक पुलिस प्रशासन द्वारा बरामद नहीं कराया गया है। इससे सिद्ध होता है कि सरकार के इशारे पर प्रशासन कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सरकार द्वारा कमिश्नर को जांच सौंपी गयी है, उसी तरह से यदि इस जांच में संसदीय कमेटी भी शामिल की जाती तो अच्छा रहता। हम इसकी जानकारी केन्द्र सरकार को देंगे और संसदीय समिति को जांच में शामिल कराने के लिये कहेंगे जिससे जांच निष्पक्ष रूप से हो सके।






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