मथुरा। सेवा के लिए धन नहीं अपितु सेवाभावी मन सत संकल्प की आवश्यकता होती है सेवा पूजा, ध्यान योग इन सबसे बड़ा धर्म है। जहाँ निज स्वार्थ, लाभ एवं यश की कामना से रहित सहायता की जाती है वह सेवा है। सेवा मंे अहम का भाव नहीं आना चाहिए। यह विचार रामदेवानन्द महाराज ने कल्याणं करोति द्वारा आयोजित निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर के समापन समारोह के अवसर पर श्रीजी बाबा चिकित्सा संस्थान गोवर्धन रोड़, मथुरा के प्रांगण में व्यक्त किये। बृज भूषण अरोड़ा ने कहा कि नेत्र ज्योति प्रदान करना पुनीत कार्य है। नेत्रों के बिना संसार अंधकारमय हो जाता है। ललित अरोड़ा ने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि नेत्र रोगियों की सेवा का कार्य अभिनन्दीय है कल्याणं करोति संस्थान अनेक वर्षो में न केवल अन्धता निवारण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है अपितु संस्थान विकलांग भाईयों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान करके पीडि़त मानवता के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रही है। विपिन आर्य ने कहा कि कल्याणं करोति से मैं पहले से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे इस शिविर के समापन समारोह के अवसर पर आने का अवसर मिल यहाँ आकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा है तथा अपने सहयोग के प्रति आश्वात किया। लोकेश गर्ग ने कहा कि सेवा से न सिर्फ दूसरों की सहायता होती है बल्कि हम स्वयं की सहायता कर रहे है। इससे हमें हमारे मन एवं आत्मा को भी प्रसन्नता होती है। संस्था महासचिव सुनील कुमार शर्मा ने शिवर की समीक्षा करते हुए बताया कि निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर में दूर दराज के अंचलों से आये 465 नेत्र रोगियों ने पंजीकरण कराकर परीक्षण कराया जिसमें से 121 नेत्र रोगियों के आॅपरेशन डाॅ. रिक्की मित्त्ल एवं डाॅ. प्रतिभा बंसल की टीम द्वारा सम्पन्न किये गये नेत्र रोगियों को पलंग विस्तर चश्मे भोजन दवा आदि की व्यवस्था पूर्णतः निशुल्क रुप से की गयी है। इस अवसर पर जगदीश चावला, बीके शुक्ला, आर. के वर्मा, राम सनेही, मनोज महोलिया आदि विशिष्ट जनों की उपस्थिति उल्लेखनीय थी।





