
अनुमान है कि देश के 18000 सुदूरवर्ती गांवों में विद्युत की सुविधा नहीं पहुंच पाई है। इस समस्या के समाधान का परंपरागत तरीक़ा केंद्रीयकृत वैद्युत ग्रिडों के माध्यम से इन गांवों को जोड़ना है। यद्यपि यह समाधान न केवल पूंजी प्रधान है और अधिक खर्चीला है, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी महंगा है क्योंकि इसके लिए विद्युत का संचरण पारंपरिक वैद्युत उत्पादन स्टेशनों से होता है।






Related Items
सौर ऊर्जा विकास के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है भारत
हाइड्रोजन की धुआं रहित शक्ति से मिलेगी भारतीय रेल को नई दिशा
नई युद्धक क्षमता की अदृश्य शक्ति है आकाशतीर