परोपकार से बनती है उल्लास भरी दुनिया

रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा है, 'तुम्हारे जीवन में जैसे-जैसे दूसरों को स्थान मिलेगा, वैसे-वैसे तुम्हारा अपना व्यक्तित्व होगा।' पुराने समय के खगोलशास्त्री मानते थे कि विश्व का मध्यबिंदु पृथ्वी ही है।

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