अटल जी के बारे लिखना उतना ही कठिन है जैसे गंगा की बहती धारा का वर्णन प्राय: शब्दातीत हो जाता है। कठोर होते हुए भी मृदुल, प्रतिपक्षी की आक्रामकता सहेजते हुए भी संबंधों में मैत्री की शालीनता, कठोर प्रहार करते हुए शब्द संयम और वाणी में सौम्यता, ऊँचाई होते हुए भी हरी दूब सी विनम्रता अटल जी को बस अटल जी बनाने वाले गुण हैं।






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