500 वर्ष पुरानी अंतरग्रही तलहटी परिक्रमा मार्ग पर उमड़ा जनसैलाब

अदृश्य शक्ति ने गोवर्धन में दिखाया चमत्कार

परिक्रमा मार्ग में नहीं टूटी मानव श्रंृखला

यमुना मिशन ने यमुना मिशन कुण्ड श्रद्धालुओं को समर्पित किया 

मथुरा। ब्रज में सबसे अधिक श्रद्धालु यदि कहीं आता है तो वह है गोवर्धन। बुद्ध पूर्णिमा के दूसरे दिन भी गिरिराज परिक्रमा कर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ कमाया। अदृश्य शक्ति के चमत्कार से ही 500 वर्ष पुरानी अतरग्रही तलहटी परिक्रमा मार्ग का श्रद्धालुओं ने श्रीगणेश किया। श्रद्धालुओं का हुजूम 500 वर्ष पुरानी अतरग्रही तलहटी परिक्रमा में घुस गया और परिक्रमा चालू कर दी।  श्रद्धालुओं की मानव श्रंृखला देखते ही बन रही थी। सारी रात मानव श्रंृखला नहीं टूटी। लोगों की आस्था देखते ही बन रही थी। अंतरग्रही परिक्रमा में श्रद्धालुओं को ऐसा लग रहा था कि अभी यहां उनका प्रभु से मिलाप होगाा। वातावरण ऐसा हो गया कि यदि सुई भी गिरे तो उसकी आवाज सभी को सुनाई दे। मानव श्रृंखला टूटने का नाम नहीं ले रही थी। भजन करती हुई कीर्तन मंडलिया गिर्राज महाराज की जय के नारे लगा रहे थे। 

रात में लोगों ने परिवारीजनों के साथ परिक्रमा का लाभ उठाया। यमुना मिशन के अथक प्रयास के बाद ही परिक्रमा मार्ग को सुविधायुक्त बनाया जा सका है। यमुना मिशन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रास्ते में जगह-जगह प्याऊ की व्यवस्था भी की है। 21$21 किलोमीटर की परिधि में जनसैलाब परिक्रमा कर रहा था। जगह-जगह यमुना मिशन की प्याऊ और श्रद्धालुओं ने भंडारे आदि लगा रखे थे। हमारे श्री मुखिया बता रहे थे कि वो कुंभ में नहीं जा सके इसलिए वह खुद यमुना मिशन कुण्ड में स्नान कर अपने आपको धन्य मान रहे थे और कह रहे थे कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। परिक्रमार्थियों की जुबान पर एक ही नाम था और वो नाम था यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल एवं उनके सहयोगी कार्यकर्ताओं को रह-रह कर धन्यवाद दे रहे थे। जो लोग कुंभ के शाही स्नान का आनन्द न ले सकें उन्होंने गिरिराज परिक्रमा में स्थित यमुना मिशन कुण्ड में स्नान कर आस्था की डुबकी लगाई। आज से यमुना मिशन कुण्ड श्रद्धालुओं के लिए खोल यमुना मिशन द्वारा खोल दिया गया है। इसमें आचमन एवं स्नान कर श्रद्धालुओं महापुण्य कमायेंगे। परिक्रमा के दौरान परिक्रमार्थियों ने चरणामृत कुण्ड, कार्ष्णिकुण्ड और यमुना कुण्ड में स्नान कर यमुना मिशन को धन्यवाद दिया। 


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