भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा संचालित एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है, जहां प्रौद्योगिकी जि़न्दगियां बदल रही है और देश की प्रगति को आकार दे बना रही है। एआई अब केवल शोध प्रयोगशालाओं या बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह हर स्तर पर नागरिकों तक पहुंच रहा है। दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को बेहतर बनाने से लेकर किसानों को फसल के बारे में पूरी जानकारी के साथ निर्णय लेने में मदद करने तक, एआई दैनिक जीवन को सरल, स्मार्ट और अधिक कनेक्टेड बना रहा है। यह व्यक्तिगत शिक्षा के माध्यम से कक्षाओं में क्रांति ला रहा है, शहरों को साफ और सुरक्षित बना रहा है, और तेज, डेटा-आधारित शासन के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बना रहा है।
इंडियाएआई मिशन और एआई उत्कृष्टता केंद्र जैसी पहलें इस परिवर्तन के केंद्र में हैं। ये कंप्यूटिंग पॉवर तक पहुंच का विस्तार कर रही हैं, अनुसंधान का समर्थन कर रही हैं, और स्टार्टअप तथा संस्थानों को ऐसे समाधान तैयार करने में मदद कर रही हैं, जिनसे लोगों को सीधे लाभ पहुंचे। भारत का दृष्टिकोण एआई को खुला, किफायती और सुलभ बनाने पर केंद्रित है। Read in English: India is rapidly changing in the era of AI...
यह समावेशी दृष्टिकोण नीति आयोग की रिपोर्ट, ‘समावेशी सामाजिक विकास के लिए एआई’ में भी परिलक्षित होता है। रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे एआई भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कौशल विकास, और वित्तीय समावेशन तक पहुंच प्रदान करके सशक्त बना सकता है। यह रेखांकित करती है कि एआई-आधारित उपकरण लाखों ऐसे लोगों की उत्पादकता और लचीलेपन को बढ़ा सकते हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देती है कि प्रौद्योगिकी गहरी सामाजिक और आर्थिक खाइयों को पाट सकती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि एआई के लाभ हर नागरिक तक पहुंचें।
भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, इस वर्ष इसके वार्षिक राजस्व के 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है। प्रौद्योगिकी और एआई इकोसिस्टम में 60 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं। देश में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं। भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं, और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्टअप में से लगभग 89 फीसदी ने अपने उत्पादों या सेवाओं में एआई का उपयोग किया।
नैसकॉम एआई एडॉप्शन इंडेक्स पर, भारत ने 4 में से 2.45 अंक प्राप्त किए हैं, जिससे पता चलता है कि 87 फीसदी उद्यम सक्रिय रूप से एआई समाधान का उपयोग कर रहे हैं। एआई अपनाने में अग्रणी क्षेत्र औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएं और खुदरा क्षेत्र, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं तथा बीमा और स्वास्थ्य सेवा हैं। ये मिलकर एआई के कुल मूल्य का लगभग 60 प्रतिशत का योगदान करते हैं।
हाल ही में किए गए एक बीसीजी सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 26 फीसदी भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर एआई परिपक्वता हासिल कर ली है। जैसे-जैसे भारत एक समावेशी एआई इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है, इसकी बढ़ती वैश्विक मान्यता इस प्रगति को दर्शाती है। स्टैनफोर्ड एआई सूचकांक जैसी रैंकिंग भारत को एआई कौशल, क्षमताओं और नीतियों में शीर्ष चार देशों में स्थान देती है। देश गिटहब पर एआई परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता भी है, जो इसके डेवलपर समुदाय की ताकत को उजागर करता है। एक मजबूत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, और गणित कार्यबल, विस्तृत अनुसंधान इकोसिस्टम, और बढ़ती डिजिटल अवसंरचना के साथ, भारत आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, और 2047 तक विकसित भारत के दीर्घकालिक विज़न को साकार करने के लिए एआई का उपयोग करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के 2025 ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रतिस्पर्धात्मकता में वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग वैश्विक एआई परिदृश्य में भारत के तेज़ विकास को उजागर करती है। रिपोर्ट 2017 से 2024 तक एआई विकास और नवाचार को मापती है। यह हालिया उपलब्धि भारत की तेजी से बढ़ती एआई प्रतिभा, मजबूत अनुसंधान क्षमताओं, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम, निवेश और आर्थिक प्रभाव, अवसंरचना, और नीति तथा शासन को रेखांकित करती है।
‘भारत में एआई बनाना और एआई को भारत के लिए कारग़र बनाना’ के विज़न से प्रेरित होकर, कैबिनेट ने मार्च 2024 में इंडियाएआई मिशन को मंजूरी दी, जिसका पांच वर्षों के लिए बजट ₹10,371.92 करोड़ है। यह मिशन भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
अपने लॉन्च से ही, मिशन ने देश की कंप्यूटिंग अवसंरचना के विस्तार में मजबूत प्रगति की है। 10,000 जीपीयू के प्रारंभिक लक्ष्य से, भारत ने अब 38,000 जीपीयू हासिल कर लिए हैं, जो विश्व-स्तरीय एआई संसाधनों तक किफायती पहुंच प्रदान करते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक स्वतंत्र व्यापार प्रभाग, इंडियाएआई द्वारा कार्यान्वित यह मिशन एक व्यापक इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है जो नवाचार को प्रोत्साहित करता है, स्टार्टअप को समर्थन देता है, डेटा तक पहुंच को मजबूत करता है, और सार्वजनिक हित के लिए एआई का जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करता है।
इंडियाएआई मिशन के सात स्तंभ हैं। पहला, इंडियाएआई कंप्यूट स्तंभ, किफायती लागतों पर उच्च-स्तरीय जीपीयू उपलब्ध कराता है। जैसा कि पहले बताया गया, 38,000 से अधिक जीपीयू शामिल किए गए हैं। ये जीपीयू केवल ₹65 प्रति घंटा की सब्सिडी दर पर उपलब्ध हैं।
दूसरा, इंडियाएआई एप्लिकेशन डिवेलपमेंट, विशिष्ट रूप से भारत की चुनौतियों के लिए एआई एप्लीकेशन विकसित करता है। इसमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, शासन, और सहायक शिक्षण प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। जुलाई 2025 तक तीस एप्लीकेशन को मंजूरी दी गई है। मंत्रालयों और संस्थानों के साथ क्षेत्र-विशिष्ट हैकथॉन आयोजित किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, साइबरगार्ड एआई हैकथॉन साइबरसुरक्षा के लिए एआई समाधान विकसित करने में मदद करता है।
तीसरा, एआईकोश, एआई मॉडल के प्रशिक्षण के लिए बड़े डेटासेट विकसित करता है। यह सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से डेटा एकीकृत करता है। इस प्लेटफ़ॉर्म में 20 क्षेत्रों में 5,500 से अधिक डेटासेट और 251 एआई मॉडल हैं। ये संसाधन डेवलपर को बुनियादी मॉड्यूल बनाने के बजाय एआई समाधान पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं। दिसंबर 2025 तक प्लेटफ़ॉर्म पर 385,000 से अधिक विज़िट, 11,000 पंजीकृत उपयोगकर्ता, और 26,000 डाउनलोड हुए हैं।
चौथा, इंडियाएआई फाउंडेशन मॉडल, भारतीय डेटा और भाषाओं का उपयोग करके भारत के अपने बड़े मल्टीमॉडल मॉडल विकसित करता है। यह जनरेटिव एआई में संप्रभु क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करता है। इंडियाएआई को 500 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए। पहले और दूसरे चरण में बारह स्टार्टअप को चुना गया। ये हैं, सर्वम् एआई, सॉकेट एआई, ज्ञानी एआई, गण एआई, अवतार एआई, आईआईटी बॉम्बे कंसोर्टियम – भारतजेन, ज़ेंटीक, जेन लूप, इंटेलिहेल्थ, शोध एआई, फ्रैक्टल एनालिटिक्स, तथा टेक महिंद्रा मेकर्स लैब।
पांचवां, इंडियाएआई फ़्यूचर स्किल, एआई-कुशल पेशेवर तैयार करता है। 500 पीएचडी फेलो, 5,000 स्नात्कोत्तर और 8,000 स्नातकों को समर्थन प्रदान किया जाता है। जुलाई 2025 तक 200 से अधिक छात्रों को फेलोशिप मिली। 73 संस्थान पीएचडी छात्रों को शामिल कर रहे हैं। टियर 2 और टियर 3 शहरों में डेटा और एआई लैब स्थापित की जा रही हैं। 31 लैब एनआईईएलआईटी और उद्योग साझेदारों के साथ लॉन्च की गई हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने लैब के लिए 174 आईटीआई और पॉलिटेक्निक को नामित किया है।
छठवां, इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण एआई स्टार्टअप को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इंडियाएआई स्टार्टअप ग्लोबल प्रोग्राम मार्च 2025 में लॉन्च किया गया। यह 10 भारतीय स्टार्टअप को स्टेशन एफ और एचईसी पेरिस के सहयोग से यूरोपीय बाजार तक विस्तृत करने में मदद करता है।
अंतिम सातवां, सुरक्षित और विश्वसनीय एआई, मजबूत शासन के साथ जिम्मेदार एआई एडॉप्शन सुनिश्चित करता है। रुचि पत्र के माध्यम से 13 परियोजनाओं को चुना और प्रारंभ किया गया है। ये मशीन अनलर्निंग, पूर्वाग्रह शमन, निजता-संरक्षित मशन लर्निंग, व्याख्यात्मकता, ऑडिटिंग, और शासन परीक्षण पर केंद्रित हैं। 9 मई 2025 को साझेदार संस्थानों को इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान में शामिल होने के लिए एक अतिरिक्त रुचि पत्र प्रकाशित किया गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार की एक नई लहर चला रही है जो दैनिक जीवन के हर हिस्से को प्रभावित करती है, स्वास्थ्य सेवा और कृषि से लेकर शिक्षा, शासन, और जलवायु पूर्वानुमान तक। यह चिकित्सकों को तेज़ी से रोगों का निदान करने में मदद करती है, किसानों को डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है, छात्रों के ज्ञानार्जन के परिणामों में सुधार करती है, और शासन को अधिक कुशल तथा पारदर्शी बनाती है।
भारत का एआई दृष्टिकोण केवल प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है, यह समावेशन और सशक्तिकरण पर केंद्रित है। राष्ट्रीय पहलों और वैश्विक सहयोग के माध्यम से, एआई का उपयोग वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को हल करने, सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने, और हर नागरिक के लिए अवसरों को अधिक सुलभ बनाने में किया जा रहा है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने और मौसम पैटर्न की भविष्यवाणी करने से लेकर न्यायालय के निर्णयों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने तक, एआई प्रगति के लिए एक ऐसे सशक्त सहयोगी के रूप में उभर रहा है, जो एक डिजिटली सशक्त और न्यायसंगत भारत के निर्माण में मदद करता है।
एआई स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी को बदल रहा है। यह चिकित्सकों को बीमारियों का जल्दी पता लगाने, चिकित्सा स्कैन का विश्लेषण करने, और व्यक्तिगत उपचार की सिफारिश करने में मदद करता है। एआई-संचालित टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को शीर्ष अस्पतालों के विशेषज्ञों से जोड़ते हैं, जिससे समय और लागत बचती है और उपचार की गुणवत्ता बेहतर होती है। भारत की हेल्थएआई, जो स्वास्थ्य सेवा में सुरक्षित और नैतिक एआई को बढ़ावा देने वाली वैश्विक संस्था है, में भागीदारी और आईसीएमआर तथा इंडियाएआई के संयुक्त प्रयासों के साथ यूनाइटेड किंगडम तथा सिंगापुर जैसे देशों के साथ सहयोग, जिम्मेदार नवाचार और वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियां सुनिश्चित कर रहे हैं।
किसानों के लिए एआई एक विश्वसनीय डिजिटल साथी है। यह मौसम की भविष्यवाणी करता है, कीट हमलों का पता लगाता है, और सिंचाई व बुआई के लिए उपयुक्त समय सुझाता है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय एआई का उपयोग किसान ई-मित्र जैसी पहलों के माध्यम से कर रहा है। यह एक वर्चुअल असिस्टेंट है, जो किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजनाओं तक पहुंचने में मदद करता है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य निगरानी, उपग्रह डेटा, मौसम इनपुट और मृदा विश्लेषण को मिलाकर रिअल-टाइम में परामर्श प्रदान करते हैं जो उपज और आय सुरक्षा में सुधार करती हैं।
एआई को भारत की शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जा रहा है, जिससे ज्ञानार्जन अधिक समावेशी, आकर्षक, और भविष्य के अनुकूल हो सके। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा VI से 15 घंटे का एआई कौशल मॉड्यूल और कक्षा IX से XII तक वैकल्पिक एआई विषय प्रदान करता है। एनसीईआरटी का दीक्षा डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म एआई उपकरणों का उपयोग करता है, जैसे वीडियो में कीवर्ड सर्च और रीड-अलाउड फीचर्स, जिससे एआई की पहुंच बढ़ती है, विशेष रूप से दृष्टिबाधित शिक्षार्थियों के लिए।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन ने अपने साझेदारों के सहयोग से युवाओं के लिए उन्नति और विकास एआई को लागू किया, एक राष्ट्रीय कार्यक्रम जिसका उद्देश्य कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को समावेशी ढंग से एआई और सामाजिक कौशल से सशक्त बनाना है। यह कार्यक्रम छात्रों को आठ विषयगत क्षेत्रों - कृषि, आरोग्य, शिक्षा, पर्यावरण, परिवहन, ग्रामीण विकास, स्मार्ट सिटी, और विधि एवं न्याय - में एआई कौशल सीखने और इस्तेमाल करने के लिए मंच प्रदान करता है, जिससे वे वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए एआई-आधारित समाधान विकसित कर सकें।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अक्सर नौकरियों के लिए खतरे के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में यह नई तरह के अवसर पैदा कर रही है। नैसकॉम की रिपोर्ट ‘एडवांसिंग इंडियाज़ एआई स्किल्स’ के अनुसार, भारत का एआई प्रतिभा आधार 6-6.5 लाख पेशेवरों से बढ़कर साल 2027 तक 12.5 लाख से अधिक होने की संभावना है, जो 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है।
एआई डेटा विज्ञान, डेटा क्यूरेशन, एआई इंजीनियरिंग, और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में मांग को बढ़ा रहा है। अगस्त 2025 तक, लगभग 8.65 लाख उम्मीदवार विभिन्न उभरती प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रमों में नामांकित या प्रशिक्षित हो चुके हैं, जिसमें 3.20 लाख एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स में हैं।
भविष्य के कार्यबल को तैयार करने के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने फ्यूचरस्किल्स प्राइम लॉन्च किया है। यह एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो एआई सहित 10 नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में आईटी पेशेवरों की रीस्किलिंग और अपस्किलिंग पर केंद्रित है। अगस्त 2025 तक, 18.56 लाख से अधिक उम्मीदवार फ्यूचरस्किल्स प्राइम पोर्टल पर साइन अप कर चुके थे, और 3.37 लाख से अधिक ने अपना पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था।
एआई शासन और सार्वजनिक सेवा प्रदायगी को पुनः आकार दे रहा है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट फेज III के तहत, न्याय प्रणाली को अधिक कुशल और सुलभ बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों को एकीकृत किया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इसके उपसर्ग जैसे मशीन लर्निंग, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्नीशन, और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग का उपयोग अनुवाद, पूर्वानुमान, प्रशासनिक दक्षता, स्वचालित फाइलिंग, इंटेलीजेंट शेड्यूलिंग, और चैटबॉट्स के माध्यम से संचार में किया जा रहा है। उच्च न्यायालयों में एआई अनुवाद समितियां सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्णयों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने की निगरानी कर रही हैं। ई-एचसीआर और ई-आईएलआर जैसे डिजिटल कानूनी प्लेटफ़ॉर्म अब नागरिकों को कई क्षेत्रीय भाषाओं में ऑनलाइन निर्णयों तक पहुंच प्रदान करते हैं, जिससे न्याय प्रदाय अधिक पारदर्शी और समावेशी बनता है।
एआई भारत की प्राकृतिक घटनाओं की भविष्यवाणी और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत कर रहा है। भारतीय मौसम विभाग एआई-आधारित मॉडल का उपयोग वर्षा, धुंध, बिजली, और आग का पूर्वानुमान लगाने के लिए करता है। एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक चक्रवात की तीव्रता का अनुमान लगाने में मदद करती है, जबकि मौसमजीपीटी, एक आगामी एआई चैटबॉट, किसानों तथा आपदा प्रबंधन एजेंसियों को मौसम तथा जलवायु से संबंधित रिअल-टाइम सलाह प्रदान करेगा।
कुल मिलाकर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत की यात्रा एक स्पष्ट विज़न और निर्णायक कार्यवाही को दर्शाती है। कंप्यूटिंग अवसंरचना के विस्तार से लेकर देशज मॉडल को प्रोत्साहित करने और स्टार्टअप का समर्थन करने तक, देश एक मजबूत एआई पारिस्थितिकी तंत्र बना रहा है जो नागरिकों को लाभ पहुंचाता है और नवाचार को बढ़ावा देता है।
कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और शासन के क्षेत्रों में की गई पहलों ने वास्तविक प्रभाव के साथ व्यावहारिक अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया है। इंडियाएआई मिशन, डिजिटल श्रमसेतु, और फाउंडेश्नल मॉडल विकास जैसी रणनीतिक पहलों से यह सुनिश्चित हो रहा है कि नवाचार हर नागरिक तक पहुंचे, साथ ही अनुसंधान, कौशल और उद्यमशीलता को भी बढ़ावा मिले। ये प्रयास भारत को विकसित भारत 2047 के अपने विज़न की ओर बढ़ते हुए, एक वैश्विक एआई नेता के रूप में उभरने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।






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