बंकिमचंद के दोस्त दीनबंधु मित्र बड़े विनोदी स्वभाव के थे और कभी-कभी उनसे भी विनोद करने से न चूकते थे।
एक बार की बात है। दफ्तर के काम से वह सिल्चर गए हुए थे। उस वक्त वह पोस्ट मास्टर निरीक्षक थे। लौटते समय उन्होंने अपने मित्र बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के लिए एक जोड़ी खूबसूरत जूते खरीद लिए।
तत्कालीन कलकत्ता वापस आने पर उन्होंने अपने एक आदमी के हाथों जूतों का पैकेट बंकिमचंद्र को भिजवा दिया। साथ में एक चिट लगा दी, जिस पर उन्होंने लिखा था- कैमन जूतो? यानी कैसा है जूता?
जूते बंकिमचंद्र को पसंद आए। उन्होंने प्रसन्न होकर पहने लेकिन एक विनोद उन्होंने भी किया। एक चिट पर कुछ लिखकर उसे लिफाफे में रखकर उसी आदमी के हाथों से अपने मित्र दीनबंधु के पास पहुंचा दिया।
जब मित्र ने लिफाफा खोला तो चिट पर लिखा था कि तोमार मुखेर मतो। यानी तुम्हारे चेहरे की तरह।





