गोवर्धन। थाना गोवर्धन पुलिस ने क्षेत्र के छोटी परिक्रमा मूार्ग के पास लक्ष्मी नारायण मन्दिर के पास से नन्द किशोर पुत्रा खिच्चू सिंह निवासी वेगनपुर मांट को आध ब्लेड के टुकड़ें के साथ बन्दी बनाया हैं।
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गोवर्धन। थाना गोवर्धन पुलिस ने क्षेत्र के छोटी परिक्रमा मूार्ग के पास लक्ष्मी नारायण मन्दिर के पास से नन्द किशोर पुत्रा खिच्चू सिंह निवासी वेगनपुर मांट को आध ब्लेड के टुकड़ें के साथ बन्दी बनाया हैं।
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स्वतन्त्रता के 67 वर्ष पूरे हो गए हैं और भारत विकासशील से विकसित देश होने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। भारत गांवों का देश रहा है पर आज के संचार युग में भारत का पिछड़ा गांव भी ग्लोबल विलेज में बदल गया है। एक क्लिक पर भारत विश्व के किसी भी कोने से जुड़ जाता है। भारत हर तरफ आगे बढ़ रहा है। बाजारवाद में भारत ने खुद को स्थापित कर लिया है पर भारत आज भी एक बड़ी चीज से निजात नहीं पा सका है जिसे गंदगी कहें, कचरा या प्रदूषण। भारत के जिस भी हिस्से में हम देखें हमें गंदगी का अम्बार दिखाई देता है। भारत में हर चीज के लिए बड़े-बड़े आंदोलन व धरने देखने को मिलते रहे हैं पर गंदगी को हमने छोटा समझा। इसके लिए छोटे-छोटे स्तर पर प्रदूषण के खिलाफ तो आवाज उठी पर समग्र रूप में गंदगी को दूर करने का प्रयास नहीं हुआ था। महात्मा गांधी जिन्हें आदर्श माना जाता है वह गंदगी के खिलाफ थे, वह स्वयं सफाई अभियान करते थे पर उनकी सोच भी सम्पूर्णता नहीं पा सकी क्योंकि वह अपने आश्रम व घर को तो साफ करते थे। उन्होंने भारत को अंग्रेजों से तो मुक्त करा दिया पर गंदगी से वह भी भारत को मुक्त नहीं करा पाए न ही गंदगी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन बना सके। साल 2014 में भारत में एक युग का परिवर्तन होता है और राजनीतिक शिखर पर एक बड़ा नाम नरेन्द्र मोदी के रूप उभरा और उन्होंने कांग्रेस को परास्त कर भाजपा के नेतृत्व में बहुमत की सरकार बनाई और प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने सरदार पटेल, महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, दीनदयाल उपाध्याय जैसे आदर्शों को सामने रखकर कार्य करने का निर्णय लिया और 15 अगस्त को लाल किले से उन्होंने सबसे बड़ा संदेश जो दिया उससे पूरे देश में शौचालय बनाने पर बल दिया और महिलाओं व बच्चियों के लिए अलग से शौचालय निर्माण की बात की साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्श को सामने रखकर भारत को गंदगी मुक्त करने का अभियान शुरू करने की बात की और 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत अभियान का शुभारम्भ कर दिया जिसमें उन्होंने 2019 तक कचरा मुक्त भारत बनाने का संदेश दिया। इस कार्य को बड़ा रूप देने के लिए उन्होंने सचिन तेन्दुलकर, अनिल अम्बानी, सलमान खान, शशि थरूर सरीखे नौ लोगों को चयनित कर ऐसे ही नौ का दल बनाने की बात की और उन्होंने स्वयं वाल्मिकी आश्रम में झाडू़ लगाकर अभियान शुरू किया और देखते-देखते उनके सभी मंत्री, केन्द्रीय कर्मचारी, सब लोग इस अभियान से जुड़ गए। झाड़ू चुनाव चिह्न वाले आप पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने भी सफाई अभियान में भागीदारी की। हम सभी लोगों ने भी झाडू़ लगाकर एवं गंदगी हटा कर सफाई अभियान में अपना योगदान दिया। हमें स्वच्छ भारत बनाना है पर हम सिर्फ झाड़ू लगाकर भारत को स्वच्छ नहीं बना सकेंगे। हमें अपनी सोच बदलनी होगी, हमें ऐसा माहौल बनाना होगा कि सड़क पर कचरा ही न फैले। हमें झाड़ू लगाने की नौबत ही न पड़े इसके लिए हमें नैतिक बल तो दिखाना होगा साथ ही हमें इसके लिए दण्डात्मक व्यवस्था भी लगानी होगी क्योंकि जब हम भारत में मेट्रो स्टेशन पर थूकने पर 200 रुपये के जुर्माने का बोर्ड पढ़ते है तो हम थूक आने पर भी अपनी थूक गटक जाते हैं। हम सिंगापुर एवं अन्य देशों का उदाहरण देखते हैं कि वहां पर गंदगी फैलाने पर कितना जुर्माना लगता है। यानी कुल मिलाकर हमें भारत को स्वच्छ बनाना है पर यह गंदगी व प्रदूषण झाडू़ से नहीं, स्वयं की सोच सफाई के लिए बना कर प्रयास करना होगा। आइए हम देखे कि कैसे होगा हमारा भारत स्वच्छ? 1. हमें सबसे पहले जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जल और वायु को सबसे पहले स्वच्छ बनाना होगा। हम जैसे एक्वागार्ड लगाकर घर में पानी साफ कर लेते हैं वैसा ही प्रयास हमें सार्वजनिक पानी के स्रोतों की स्वच्छता पर देना होगा - हमें नदियो- गंगा, यमुना एवं अन्य जल को प्रदूषण मुक्त बनाना होगा इसके लिए पहला सार्थक प्रयास यह होगा कि हम स्वयं कचरा न डालें। पूजन सामग्री, घर की मूर्तियां या प्लास्टर ऑफ पेरिस व केमिकल युक्त दुर्गा, गणेश प्रतिमा नदियों में विसर्जित न करें। वहीं बड़े स्तर पर उद्योगों का अपशिष्ट, सीवर का गंदा पानी, नदियों में जाने से रोकें। एसटीपी व ईटीपी व्यवस्था को बेहतर कर पानी को शोधित कर उसे सिंचाई में प्रयुक्त करें। 2. हमें वायु प्रदूषण रोकने के लिए सीएनजी व एलपीजी गैसों व इलेक्ट्रॉनिक बैटरी चालित वाहनों का प्रयोग करना होगा। साथ ही, वाहनों में प्रदूषण की नियमित जांच करानी होगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगे, फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं की भी हमें समुचित व्यवस्था करनी होगी। हमें अम्लीय वर्षा रोकने का प्रयास करना होगा, ग्रीन हाउस गैसों को नियंत्रित करना होगा। एसी, फ्रिज से निकलने वाली ओजोन गैस पर नियंत्रण लगाना होगा जिससे ओजोन छिद्र को कम किया जा सके। शवों को खुले में जलाने से वातावरण में फैलने वाले प्रदूषण को हमें विद्युत शवदाह ग्रह के माध्यम से कम करना होगा। धार्मिक रीति-रिवाज के अनुरूप गंगा-यमुना में मृत पशुओं व बच्चों के शवों को नही बहाना से होगा। 3. खुले में शौच करने वाली व्यवस्था को रोकना होगा। नदी तटों को तो इससे पूरी तरह मुक्त करना होगा। शौच से फैलने वाली गंदगी व प्रदूषण पर नियंत्रण लगाना स्वच्छ भारत का पहला कदम होगा। सुलभ इंटरनेशनल द्वारा शौचालय के लिए जैसा प्रयास हुआ है वैसा ही प्रयास पूरे भारत में किया जाए। सरकारी व निजी शौचालय न केवल बने वरन् उनका समुचित प्रयोग हो सके इसके लिए प्रचार-प्रसार माध्यम से लोगों को जागरूक करना होगा। इससे महिला सुरक्षा व स्वास्थ्य दोनों ही सुरक्षित हो सकेगा। साथ ही उप्र के कुशीनगर की प्रियंका को अपने ससुराल से शौचालय के अभाव में वापस न लौटना पड़े। 4. भारत में कृषि कार्य में प्रयुक्त मृदा में रासायनिक खाद व कीटनाशक का अत्यधिक प्रयोग मृदा की उर्वरता को प्रभावित करता है, भूमि को बंजर बनाता है, वहीं भूमिगत जल को भी प्रभावित करता है। नदी तट के गांवों में रसायन का प्रयोग नदियों के जल को प्रभावित करता है। हमें रासायनिक खेती की जगह जैविक एवं प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देना हेागा यह स्वच्छ भारत का एक और बड़ा कदम होगा। 5. स्वच्छ भारत अभियान के लिए जो एक और अनिवार्य व बड़ा कदम है वह है, ठोस अपशिष्ट का निपटान करना। जिसमें हम सबसे बड़े रूप में प्लास्टिक व पॉलिथीन को ले सकते है। आज पॉलिथीन संस्कृति की सस्ती सुविधा ने मनुष्य को सिर से पांव तक पॉलिथीन में कैद कर लिया है। खाने-पीने का समान हो- दूध, दही, चाय, घी, सब्जी, आटा, चावल, दाल सब इसमें ही पैक है। इसने झोला संस्कृति को नष्ट कर दिया है लोग पॉलिथीन का प्रयोग कर इसे नालियों में फेंक देते हैं जो नालियों को जाम कर देता है जिससे बारिश में मुहल्लों में पानी भर जाता हैं वही ये बहकर गंगा यमुना एवं अन्य नदियों को प्रदूषित कर इनके तटों को गंदा करते हैं और नदियों के प्रवाह को भी प्रभावित करते हैं। पॉलिथीन भूमिगत जल स्रोत को भी प्रभावित करता है। और जिस सफाई की बात आज हो रही है उस गंदगी का 80 प्रतिशत पॉलिथीन की वजह से ही है क्योंकि बाकी गंदगी तो बायोडिग्रेडेबल है एंव नष्ट भी हो जाती है पर पॉलिथीन कचरा नॉन-बायोडिग्रेडेबल है जिसके कारण वह 100 साल में भी नष्ट नहीं होता और चारों तरफ फैला रहता है। नगर निगम जैसी सरकारी संस्था उसका सही से निपटान भी नहीं कर पाता है। स्वच्छ भरत के मार्ग का पॉलिथीन कचरा सबसे बड़ा रोड़ा है। 6.- ई-वेस्ट - आज के इस दौर में गंदगी का एक बड़ा प्रारूप ई-वेस्ट से फैलने वाला कचरा भी है क्योंकि भारत में मोबाइल, कम्प्यूटर आदि का कचरा दूर तक फैला रहता है इसका उचित निपटान नहीं हो पाता है। कार्बन क्रेडिट की बात होती है पर यह लाभ कार्बन उत्पन्न करने वाली कम्पनियों को ही कार्बन क्रेडिट के रूप में मिलता है। भारत में हम अभी भी इसे हटा नहीं पाए हैं यह स्वच्छ भारत की एक बड़ी बाधा है। 7. गंदगी को दूर करने कई प्रारूप हम देख रहे हैं उनमें ही हम ध्वनि प्रदूषण व शोर को भी देखते हैं जो कान फोडू साउण्ड, डीजे, बैण्ड प्रेशर, हार्न व पटाखों के शोर से होता है। आज इस गंदगी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। पार्टियों में शोर की वजह से लोग बात भी नहीं कर पातें है। श्रवण शक्ति के कई गुना अधिक डेसिबल का प्रयोग होता है। हम इसे कम नहीं कर पा रहे जो गंदगी के रूप में हमे प्रभावित करता है। इसके शोर से हमें नियंत्रण पाना होगा नहीं तो मानसिक अवसाद व चिढ़चिढ़ेपन से हम परेशान होते रहेंगे। शोर का एक बड़ा प्रारूप हमें पटाखों से देखने को मिलता है जो शादी विवाह मे देर रात्रि तक बजता है। वहीं दीपावली जैसे पर्व पर तो प्रतिबन्धित पटाखे अरबों रूपये के बजाए जाते है जिसका स्वरूप बडी गंदगी के रूप में दीपावली की अगली सुबह के रूप में हम देखते है जो वातावरण को प्रदूषित कर अम्लीय वर्षा का भी कारक बनता है। स्वच्छ भारत अगर बनाना है तो हमें आतिशबाजी बन्द कर उसे प्रतिबन्धित करना होगा। 8. शहर में पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं जो मल-मूत्र, गंदगी आदि सड़क पर फैलाते हैं। नदियों में जाकर उसके पानी को प्रदूषित कर डालते हैं। सड़क पर घूमने वाले गाय, बैल, भैंस, सांड, कुत्तों से फैलने वाली गंदगी हमें हर हाल में रोकनी होगी। सुअर भी गंदगी फैलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं इनपर पाबंदी लगानी होगी। लावारिस पशुओं को पकड़ना होगा और यदि उसका मालिक है तो उस पर बड़ी पेनल्टी लगानी होगी। 9. स्लाटर हाउस से फैलने वाले रक्त व चमड़े के कचरे को फैलने से रोकना होगा। मांस का व्यवसाय खुले में न हो इसे भी रोकना होगा और अगर इससे गंदगी फैले तो हमें इसका व्यवसाय करने वालों को दण्डित करना होगा। 10. अब गंदगी फैलाने वाले सारे कारकों में सबसे बड़ा कारक जो हमें देखने में छोटा लगता है पर पूरे भारत विशेषकर उत्तर भारत को अपनी पूरी गिरफ्त में लिए है। जो थूकने की संस्कृति पिच-पिच करने में हम भारतीय अपनी शान समझते हैं। एक तो हम साधारण थूक को सड़क पर थूकते हैं वहीं दूसरी ओर रंगीन थूक से भी पूरे भारत के सार्वजनिक स्थलों, ऑफिस, बैंक आदि को थूक से रंगने में हम कहीं भी पीछे नहीं दिखते। इसका बड़ा कारण हम तम्बाकू, गुटका, खैनी व पान के रूप में खाकर थूकते हैं। पान खाने वाला या गुटका खाने वाला उसे घोंटता नहीं है उसे वह पीक बनाकर थूकता है कुछ लोग सभ्य बनकर उसे बेसिनों में कुछ बाथरूम में या कुछ डस्टबिन में थूकते हैं पर यहां-जहां थूकते है वह स्थान गंदा ही होता है। उत्तर भारत में बिहार, उप्र, मप्र, में तो हर 100 मीटर पर थूक पैदा करने वाली मशीन या गुमटी मिलती है। लोग पान खाते हैं, मुंह खोला व वहीं पिच मारी। लोग कार मोटर, रेल में चलते-चलते थूकते हैं जिससे सड़क तो गंदी होती है कभी-कभी लोगों पर भी यह थूक पड़ती है। लोगों के कपड़े गंदे हो जाते हैं। जब तक थूकने पर पेनल्टी व चालान नहीं लगेगा लोग नही मानेगें। बेचने वाले व खाने वाले दोनों को बराबर का दोषी मानकर सजा देनी होगी। नहीं तो हम कितना भी झाडू़ लगा ले कुछ नहीं होगा क्योंकि थूकने वालों की संख्या झाडू़ लगाने वालों से ज्यादा है। हमारे प्रधानमंत्री को आज कुछ करना है तो झाड़ू उठाने से पहले थूकने वालों के मुंह पर टेप लगाना होगा। आज बड़े शान से गुटका खाकर लोग गंगा में थूकते है पर उनपर कोई कार्रवाई नहीं होती। हमारे योग गुरू रामदेव कहते हैं कि सिंगापुर में च्यूइंग गम खाना भी जुर्म है पर भारत में तो खईके पान बनारस वाले मुम्बई तक फैले हैं। इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाना होगा। इसे राजस्व का साधन न मानकर पान, गुटका, सिगरेट, शराब सब पर सार्वजनिक रूप से ब्रिकी व खरीद पर साथ ही उपभोग पर रोक लगानी होगी। स्वच्छ भारत निर्माण करना है तो पहली झाड़ू इन थूकने वाले अपराधियों पर चलाया जाए तो सड़क की गंदगी वैसे ही दूर हो जाएगी। हर चीज में आधुनिक बनने वाले प्रधानमंत्री अगर डिजिटल इण्डिया चाहते हैं तो पॉलिथीन, गुटका, सिगरेट, पान पर तत्काल पाबन्दी लगाएं और सड़क पर एवं गंगा में थूकने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाएं और पकड़े जाने पर छह माह की कठोर कारावास की सजा भी हो। हमें प्रधानमंत्री से एक निवेदन करना है कि जैसे स्वास्थ्य के लिए सीजीएचएस है वैसे ही केन्द्रीय सफाईकर्मी नियुक्त करने होंगे और सफाई व्यवस्था को नगर निगम को देने से बचना होगा क्योंकि नगर निगम तो राजनीतिक अखाड़ा है, पार्षद व मेयर तो राजनीति करते हैं। नगर आयुक्त एवं अन्य पर्यावरण इंजीनियर चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। बाकी भ्रष्टाचार अपना काम करता है। एक सक्षम सफाई की टीम बनानी होगी। एनजीओ को महत्व देना होगा, उनकी आईबी से जांच कराने की जगह उनके कार्यों की गुणवत्ता देख उन्हें मानदेय देखकर इस अभियान से जोड़ना होगा। अगर हमें थूकने वाले पर रोक लगानी है तो हर गली मुहल्ले में चालान करने वाले वॉलन्टियर्स बनाने होंगे। इस कार्य में सीनियर सिटिजन को जोड़ना होगा। हर शहर में फैलने वाले कचरे का डिस्पोज न केवल खाद बनाने में हों वरन उसे भविष्य के फ्यूल के रूप में भी बनाना होगा। इसकी शुरुआत जेपी ग्रुप ने पंजाब के चंडीगढ़ में किया है। उसे पूरे देश में, हर बड़े शहरों में लागू करना होगा जिससे शहर की सारी गंदगी नष्ट हो जाएगी और यह सस्ता ईंधन भी उपलब्ध कराएगा। सारे देश के म्यूनीसीपल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन को चंडीगढ़ शहर का उदाहरण लेना होगा जो भारत में स्वच्छता में नम्बर वन जिला है। हरियाली से भरा चारों तरफ सफाई दिखती है क्योंकि लोग यहां सफाई पर बल देते हैं जहां देखों वहीं दुकान खोलना या सड़क पर रेहड़ी नहीं लगती है। हमें गंदगी हटानी है तो जलवायु परिवर्तन, जल, वायु, ध्वनि सभी प्रकार के प्रदूषण रोकने होंगे। हमें सक्षम एवं समग्र रूप से रोक लगानी होगी। हमें झाडू़ के साथ-साथ झाड़ू न लगाने पर भी बल देना होगा। यहां दण्ड के स्वरूप को मजबूत बनाना होगा। नहीं तो हम गांधी जी की 150वीं जयंती क्या 200वीं जयंती भी मना लें हम भारत को गंदगी में मुक्ति नहीं दिला पाएंगे। जैसे कि सर्वोच्च न्यायालय का गंगा के सन्दर्भ में कहना है कि यही प्रयास रहा तो गंगा 200 साल में भी प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी चाहे मेडिसिन स्केवअर, अमेरिका में जाकर गंगा की सफाई की बात करें या जापान जाकर गंगा को साफ करने का सहयोग मांगें हम गंगा को प्रदूषण मुक्त नहीं कर पाएंगें। हमें पहले गंदगी फैलाने वालों को रोकना होगा। चाहे जन-जागरूकता कितनी ही हो पर उसमें हमें दण्ड के स्वरूप को भी शामिल करना होगा। पॉलिथीन का प्रयोग करने वाले को पकड़ने वाले पर 500 रुपये का तत्काल जुर्माना लगे। पॉलिथीन को माइक्रॉन के जाल में न उलझाकर उसकी बिक्री पर रोक लगानी होगी। गुटका व तम्बाकू प्रतिबंधित करना होगा न कि पाउच पर सांप, बिच्छू का चित्र बनाकर झूठा डर पैदा करने का दिखावा करना। इससे भारत स्वच्छ नही होगा। हमें दोहरी नीति नहीं अपनानी होगी कि हम सड़क पर गुटका खाकर थूकें और हमारे स्कूल के बच्चे या नौकरी करने वाले या स्वयंसेवी संस्था के लोग गांधीवादी बन झाड़ू ले उसे साफ करते फिरें, यह उचित नहीं है। हम गंदगी न करने की कसम लेते हैं और लोगों से भी न करने को कहेंगे, न मानने पर पेनल्टी लेने की टोल-फ्री व्यवस्था होनी चाहिए। हां, चालान पुलिस के हाथों में न होकर इसे सीनियर सीटिजन या स्वयंसेवी संस्थाओं के हवाले किया जाए जिन्हें पुलिस प्रोटेक्शन मिलनी चाहिए। जो लोग पेनल्टी लेने वालों की बात न माने, इनकी शिकायत पर पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाए। हमें प्रदूषण रोकने एवं सफाई कार्य को स्कूली स्तर पर लेना होगा। बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा में इसे कोर्स में डाला जाए एवं प्रेक्टिकल मार्क्स में जोड़ा जाए। एनएसएस, एनसीसी एवं स्काउट में इसे लिया जाए। बच्चों व महिलाओं को बायो-डिग्रेडेबल व नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे के बारे में बताया जाए और दोनों कचरे को एकट्ठा करने के लिए अलग-अलग डस्टबिन घर से लेकर स्कूल, कॉलेज व सार्वजनिक स्थल पर रखे जाएं। उसका निपटान दो बार किया जाए एक बार सुबह व दूसरी बार शाम को। कानून का राज स्थापित हो। लोगों की सोच पर झाड़ू लगाकर उन्हें सफाईयुक्त यानी स्वच्छ भारत निर्माण कराने की ओर अग्रसर कर डिजिटल इण्डिया और मेक इन इण्डिया की अवधारणा को साकार करना होगा। हर घर हर स्कूल एवं हर गांव को शौचालय सुविधा देनी होगी। तभी हम प्रदूषण मुक्त स्वच्छभारत का निर्माण कर सकेंगे।
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रमण रेती आश्रम में मनाये जा रहे पाँच दिवसीय दीपावली महोत्सव की परम्परा में ठाकुर रमण विहारी लाल जी मन्दिर में विशाल अन्नकूट का भोग लगाया गया। दर्शन खुलते ही रमण रेती आश्रम गिर्राज महाराज की जय के स्वरों से गूँज उठा। हजारों भक्तों ने अन्नकूट का प्रसाद प्राप्त कर धन्य अनुभव किया।
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धरा पर अवतरित आकाश के तारे दीपावली-पर्व पर रमण रेती स्थित स्वामी गुरुषरणानन्द जी महाराज के आश्रम के निकट ब्रह्मांड घाट का यमुना तट हजारों - हजारों दीपकों से जगमगा उठा तो ऐसा लगा मानो आकाश के तारे धरा पर अवतरित हो गये हों। पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मांड घाट वह प्राचीन-पुरातन स्थल है जहाँ माटी खाने की शिकायत पर जब बाल कृष्ण ने मैया जसोदा को अपना मँह दिखाया तो उसमें ब्रह्मांड के दर्शन हुए थे।यमुना तट स्थित ब्रह्मांड घाट पर स्वामी गुरुषरणानन्द महाराज ने विधि-विधान पूर्वक यमुना जी का पूजन कर आरती उतारी और यमुना जी की लहरों पर दीप प्रवाहित किये। इसी के साथ देश-विदेश से आये महाराज जी के शिष्यों ने हजारों की संख्या में ब्रह्मांड घाट की सीढि़यों पर दीप रखे जिनसे ब्रह्मांड घाट के चारों ओर का क्षेत्र जगमगा उठा। इस अवसर पर स्वामी स्वरूपानन्द अधिकारी, स्वामी हरिदास, आचार्य अशोक कुमार जोशी, सुरेश चन्द्र अग्रवाल, मोहन स्वरूप भाटिया, जगदीश धींगरा, जमुना प्रसाद मिश्रा, ओम प्रकाश जैन आदि उपस्थित थे।
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युवती की हत्या के बाद एक्सप्रेस वे जाम करने का प्रयास करते युवती के परिजन राया। थाना क्षेत्र के गाॅव ककरेटिया के जंगलों में एक कूंए में युवती का शव मिलनें से क्षेत्र में सानसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर शव को कब्जें में कर मृतका की शिनाख्त कर उसके परिजनों को मौके पर बुला लिया। परिजनों ने आक्रोशित होकर एक्सप्रेस वे पर जाम लगा दिया जिसे जल्द ही पुलिस द्वारा समझा बुझा कर खुलवा लिया गया। परिजनों का आरोप है युवती एक कथित प्रेमी ने उसकी हत्या कर शव को कुंए में फैंका है। पुलिस ने युवती के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं। परिजन युवती के प्रेमी पर हत्या करने का आरोप लगा रहे है वहीं इसे आॅनर किलिंग कके मामले के रूप में भी देखा जा रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के गाॅव ककरेटिया में आज प्रातः काल खेतों में शौच के लिए गये ग्रामीण हाथ धोने को खेत पर बनें कूंए पर पहुंचे तो उन्हें कूंए में युवती का शव तैरता मिला जिसे देख ग्रामीणों में सनसनी फैल गई। घटना की जानकारी पाकर सैकड़ों ग्रामीण एकत्रित हो गये। जिन्होंने घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर शव को कूंए से वाहर निकलवाया और मृतका की शिनाख्त ज्योति पुत्री जगदीश निवासी गांव कटैला एवं हाल निवासी लंकापुरी बिचपुरी थाना राया के रूप में कर उसके परिजनों को भी मौके पर बुला लिया। आक्रोशित होकर परिजनों ने एक्सप्रेस वे पर जाम लगा दिया जिसे जल्द ही पुलिस द्वारा समझा बुझा कर खुलवा लिया गया। पुलिस ने शव को पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं। पुलिस के अनुसार युवती की हत्या कर शव को छिपाने के उद्देश्य से शव कूंए में फैंका गया हैं। वहीं मृतका के परिजनों का आरोप है कि युवती एक युवक के प्रेम जाल में फंसी हुई थी और विगत रात्रि घर में भी इसी बात को लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी नाराज होकर युवती घर से भाग निकली थी। परिजनों ने युवती के कथित प्रेमी द्वारा युवती की हत्या करने का आरोप लगाया है वहीं लोग इसे आॅनर किलिंग का भी मामला बता रहे है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच करने के प्रयास में जुटी हुई हैं। जबकि युवती का कथित प्रेमी अभी तक फरार है पुलिस उसे भी खोजने के प्रयासों में है। -
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तौमस के कथित मित्रों की राय पर पुलिस द्वारा किया गया तुगलकी फैसला आखिर कितना सही है। आखिर असम से अपने घर बार को छोड़ कर तौमस के सहारे पर साथ जीने मरने की कसमें खाकर यहां आयी सीमा परियाल अब जब जीवन के बीच रास्ते में छोड़ दी गयी है तो वो किस के सहारे जियेगी और अब उसका क्या होगा। कथित समाजियों और पुलिस ने भी अपने स्वार्थों के चलते चन्द पलों में ही पति पत्नि के सम्बन्धों को खेल की भांति तुड़वा डाला। अपने घर और अपनों से हजारों किलो मीटर दूर राधाकुण्ड में अब उस अकेली अबला का क्या हश्न होगा जब कि थाने से जाते जाते वो कहती रही कि अब वो किसके सहारे रहेगी, वो तौमस के बिना नहीं रह पायेगी और मर जायेगी। क्या सच में ही वो अपने कहे अनुसार वो तौमस के वियोग मंे मर जायेगी या कहीं ये सदमा उसके जीवन को ही न बदल दे। सम्भव है अकेला जानकर भी कहीं कोई अनहोनी उसके साथ घटित न हो जाये। यदि ऐसा कुछ होता है तो इस सबका जिम्मेदार कौन होगा? फैसला कराने तौमस के वे कथित मित्र या थाना की जिम्मेदार पुलिस ? ये अब समय की गर्त में छिपा है। कस्बा राधाकुण्ड में इसी प्रकार से सैंकड़ों विदेशी युवक युवती किराये पर मकान लेकर या विभिन्न धर्मशालाओं और गैस्ट हाउसों में पिछले लम्बे समय से रहते चले आ रहे है। जिनमें अनेकों के तो वीजा अवधि भी समाप्त हो चुकी और उनके सही अते पते भी यहां कोई नहीं जानता है। वास्तव में ये जांच का विषय है कि कैसे बिना किसी अते पते के लोग कैसे इन्हें किराये पर रख लेते है वीजा समाप्त होने के बावजूद भी ये कैसे यहां रह जाते है। यहां रहकर ये लोग यहां युवक युवतियों को अपना शिकार बनाते है और उनसे अपना मतलब सिद्ध होते ही उन्हें बीच मंझधार मंे फंसा हुआ छोड़ कर भाग निकलते है। इनके खिलाफ कोई कार्यवाही भी नहीं हो पाती। इससे बचने को ये लोगा स्थानीय लोगों का एक ऐसा सुरक्षात्मक काॅकस बना लेते है तो हर स्थिति में इन्हे बचाने को भी तैयार रहता है।
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मेलांे की विशाल तैयारियों का नहीं दिखा मिलावटखोरों पर कोई असर गनीमतः बड़े खतरांे से बच गयी लाखों जिन्दगियां, नहीं घटी कोई दुर्घटना मथुरा। जनपद में अपूर्व जोश और उत्साह के साथ ही दीपावली पर्व का समापन हो गया है। वहीं गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया के यहां लगने वाले विशाल मेले भी सकुशल सम्पन्न हो गये है। किन्तु इस दौरान यहां जनपद भर मंे बेखौफ होकर मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री हर ओर होती नजर आयी और जनपद भर में खाद्य और आपूर्ति विभाग द्वारा कहीं भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी न ही इनके विरूद्ध कोई विशेष अभियान चलाया गया। गनीमत तो ये रही कि इन मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से कहीं कोई बड़ी दुर्घटना घटित नहीं हो सकी। इन त्यौहारों की समाप्ति के साथ ही सक्रिय हुए खाद्य विभाग के ऐजेन्ट अब बाजारों में नजर आने लगे है। जो अपने तयशुदा दुकानदारों से त्यौहार पर एकत्रित हुई रिश्वत की वसूली को ले जाने में जुटे है। समूचे हिन्दुस्तान के साथ ही ब्रज मण्डल में अनोखे जोश और उत्साह के बीच धूमधाम से मनाये जाने वाले हिन्दुओं के प्रमुख पर्व दीपावली पर यहां जमकर सिन्थैटिक दूध और उनसे बनी मिठाईयां बेझिझक औैर बेखौफ होकर बेची गयी। जनपद के लगभग सभी छोटे बड़े दुकानदारों ने लम्बे स्टाॅक में रखी बासी अथवा दूध घी की कमी के चलते मिलावटी तैयार हुई मिठाईयां एवं अन्य खाद्य सामिग्री धड़ल्ले से बेची। जिला प्रशासन के किसी भी बड़े अफसर ने अथवा खाद्य और आपूर्ति विभाग के किसी अधिकारी ने न तो इस ओर ध्यान ही दिया और न देना चाहा। कागजों में मेले के लिये तैयार हुए अभियान भी कागजों में ही सिमट कर रह गये। जनपद के हर गांव, कस्बा, नगर और शहर में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और यम द्वितीय पर्व के पांच दिनों में करीब 25-30 हजार दुकानों से 80 करोड़ से सवा अरब रूपये कीमत की मिठाईयां लोगों द्वारा खरीदी गयी। इनमें से 90 प्रतिशत से भी अधिक दुकानदारों ने लम्बे स्टाॅक में रखी बासी अथवा दूध घी की कमी के चलते मिलावटी सिन्थैटिक दूध की मिठाईयां बेखौफ होकर बेची लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को इसकी कानों कान खबर तक नहीं हो सकी। इस दौरान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कहीं भी कोई भी ठोस या बड़ी कार्यवाही इन दुकानदारों के खिलाफ अमल में नहीं लाया। न ही उन्होंने मेला तैयारियों की प्रशासनिक बैठकों में निर्धारित हुए अभियानों को ही धरातल पर उतारा। बल्कि उन्होंने सिर्फ सिर्फ कागजों में इसकी खाना पूर्ति कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। इसे ब्रज मण्डल के आराध्य देव की कृपा कहें या कुछ औैर वरना इतने बड़े स्तर पर बेची और खरीदी गयी मिठाईयों और खाद्य सामिग्रियों से लाखों के जीवन पर बन आयी थी इसके बावजूद ये गनीमत ही रही कि कहीं कोई अप्रिय घटना सामनेे नहीं आयी। वरना खाद्य और आपूर्ति विभाग की लापरवाही से तो लाखो का जीवन खतरे में पड़ ही गया था। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी की माने तो इन त्यौहारों के समापन के बाद सक्रिय हुए विभागीय ऐजेन्ट अब जनपद भर के बाजारों में नजर आने लगे है। ये एजेन्ट यहां बाजारों में मेले के दौरान किसी भी प्रकार की खाद्य सामिग्री को बेचने की एवज मंे तय की हुई धनराशि को लेने आये है। हर महीने होने वाली ये अवैध वसूली हर बार की तरह दीपावली पर कई गुना अधिक की जाती है। खाद्य निरीक्षकों को पहुंचायी जाने वाली ये धनराशि बाजारों में दुकानदारों द्वारा स्वतः ही एक दुकानदार के पास एकत्रित कर ली जाती है। इसी तरह हर गांव में एक दुकानदार, कस्बों में करीब दर्जन भर दुकानदार, नगरों व शहरों में इनकी गिनती सैंकड़ों तक पहुंच जाती है। इन दुकानदारों द्वारा खाद्य निरीक्षकों के द्वारा निश्चित किये गये एजेन्टों को ये राशि समय से अदा कर दी जाती है। खाद्य निरीक्षक को एजेन्टों के माध्यम से पहुंचन वाली इस राशि का बंटवारा अधिकारियों तक किया जाता है। इसी कारण कोई भी अधिकारी अपने अवैध वूसली के इन श्रोतों को बन्द करने का प्रयास ही नहीं करता है। चन्द पैसों की खातिर धड़ल्ले से चलवाये जा रहे जहर के इस कारोबार में लगभग हर स्तर तक पहुंचायी जाने वाली मासिक रकम इसे बन्द नहीं होने देती है। वहीं इस कारोबार में लगे लोग दीपावली के पर्व का हर वर्ष बेसब्री से इन्तजार करते है कि कब दीपावली आये और उनकी चांदी कट सके।
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मथुरा। थाना फरह क्षेत्र अन्र्तगत फरह चैराहे के पास 30 वर्षीय पैदल चल रहे पिता पुत्र को बुलेरो ने टक्कर मार दी। जिससे पिता की मौके पर ही मौत हो गई तथा उसका ढ़ाई वर्षीय बालक भी घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मिली जानकारी के अनुसार गोपाल उम्र 30 वर्ष पुत्र महावीर निवासी गांव धर्मपुरा चैकी ओल थाना फरह अपने ढ़ाई वर्षीय पुत्र को डाॅक्टरों के यहां दिखाने जा रहा था। तभी फरह चैराहे के पास तेज गति से आती बुलेरो गाड़ी नम्बर आरजे 11 यूए 1133 के चालक ने गाड़ी को लापरवाही से चलाते हुए पैदल चल रहे पिता पुत्र में टक्कर मार दी जिससे गोपाल की घटना स्थल पर ही मौत हो गई तथा उनका पुत्र घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया तथा ढ़ाई वर्षीय बालक को उपचार के लिए स्वर्णजयंती में भर्ती कराया।
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मथुरा। एसओ रिफाइनरी महेश यादव ने क्षेत्र की जनता में भय व आतंक फैलाने पर अमरचंद उर्फ बबली पुत्र छतर सिंह निवासी भुड़रसू रिफाइनरी आदि चार लोगों को धारा 110 में निरुद्ध किया हैं।
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मथुरा। उद्यमिता विकास जैसे महत्त्वपूर्ण विषय पर जीएलए विश्वविद्यालय के इन्स्टीट्यूट आॅफ बिजनैस मैनेजमेन्ट में भारतीय प्रबन्धन संस्थान अहमदाबाद और नर्चर टैलेन्ट अकादमी द्वारा एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें नर्चर टैलेन्ट अकादमी के सीईओ अमित ग्रोवर व उनकी टीम द्वारा विद्यार्थियों को अपने उद्यम को स्थापित करने के गुण सिखाये गये। इस कार्यशाला के अन्तर्गत एमबीए, बीबीए, बीकाॅम, बीटैक सहित कई अन्य पाठ्यक्रमों के छात्रों को सीखने का मौका मिला। इस दौरान अमित ग्रोवर ने छात्रों को बताया कि किसी भी उद्यम को विकसित करने के लिए वर्तमान में सबसे श्रेष्ठ और सरल साधन डिजीटल प्रमोशन है, जिसके अन्तर्गत हम किसी भी सोषल साइट या बेवसाइट पर उद्यम से सम्बन्धित विज्ञापन देकर उसका प्रचार कर सकते है। विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. आनन्द मोहन अग्रवाल ने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों में कुशल व्यक्तित्व व उद्यमिता के गुण होना बेहद जरूरी है, जिससे समाज व राष्ट्र का सुदृढ़ निर्माण किया जा सके। इस कार्यशाला के दौरान एक बिजनैस प्लान प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी, जिसमें प्रथम स्थान पर रहे बीटैक तृतीय वर्ष के छात्र बल्देव पटवारी व उनकी टीम ने साॅलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट पर प्लान प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार हम बेकार चीजों का सदुपयोग करते हुए उसकी उपयोगिता को बढ़ाकर उद्यमिता का विकास कर सकते है। वहीं बीबीए फैमिली बिजनैस प्रथम वर्ष के शुभम व शिवानी की टीम को क्रियेटिव फर्नीचर्स बिजनैस आइडिया प्रस्तुत करने पर दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता में तृतीय स्थान के लिए छात्रों के दो समूहों में टाई रहा। जिसमें बीटैक कम्प्यूटर साइंस द्वितीय वर्ष के छात्र अरूण विश्वकर्मा व पार्थदत्त ने गेम डवलपमेन्ट पर बिजनैस प्लान प्रस्तुत किया और एमबीए प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य व उनकी टीम ने वैडिंग प्लान पर अपना प्लान प्रस्तुत किया। प्रोग्राम के अन्तर्गत विजेता टीमों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम का कुषल संचालन कल्चरल काॅर्डिनेटर अवनीश शर्मा एवं प्रबन्धन विभाग के विद्यार्थियों अनुराग विश्वकर्मा, प्रियंका कपूर, वंशज राॅय आदि ने किया। इस अवसर पर प्रो. विकास त्रिपाठी, प्रो. सोमेश धमीजा, अरूण कौशल, कुशाग्र कुलश्रेष्ठ, शैफाली गर्ग, मनीशा पाराशर आदि गणमान्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।
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